Bharat Tiwari Encounter Case:मानवाधिकार आयोग सख्त, मुख्य सचिव, DGP और भोजपुर SP से मांगी जांच रिपोर्ट,13 जुलाई को सुनवाई

भोजपुर के आरा में हुए भरत भूषण तिवारी कथित पुलिस मुठभेड़ मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर एसपी से चार सप्ताह में तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट मांगी है।

बिहार मानवाधिकार आयोग सख्त, मुख्य सचिव, DGP और भोजपुर SP से मांगी जांच रिपोर्ट- फोटो : Reporter

बिहार के भोजपुर के आरा में हुए भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में मिली शिकायत पर स्वतः संज्ञान लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इन सभी शीर्ष अधिकारियों से अगले चार सप्ताह के भीतर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट (Fact-Finding Report) तलब की है।


आत्मसमर्पण के बाद गोली मारने का आरोप

मानवाधिकार आयोग में दर्ज कराई गई शिकायत में स्थानीय पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले 32 वर्षीय भरत भूषण तिवारी ने कथित मुठभेड़ से पहले ही पुलिस के समक्ष पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने नियमों को ताक पर रखकर उन पर गोलियां चला दीं, जिससे उनकी मौत हो गई। शिकायतकर्ता ने इस पूरी घटना को कानून और मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करार दिया है।


रिटायर्ड जज से जांच और मुआवजे की मांग

मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शिकायतकर्ता ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच किसी अवकाश प्राप्त (रिटायर्ड) न्यायाधीश की निगरानी में कराने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार की ओर से इस कथित एनकाउंटर में सीधे तौर पर शामिल रहे शाहपुर थाने के पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने और प्रभावित पीड़ित परिवार को उचित वित्तीय मुआवजा व सुरक्षा देने की भी मांग उठाई गई है।


आयोग ने माना संज्ञान लेने योग्य, 13 जुलाई को अगली सुनवाई

आयोग ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि शिकायत में पुलिस पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से संज्ञान लेने योग्य हैं। आयोग इस बात की गहनता से पड़ताल करना चाहता है कि कथित मुठभेड़ के दौरान प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। मानवाधिकार आयोग के इस कड़े कदम के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 जुलाई 2026 की तारीख तय की है, जिसमें रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।