Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी एनकाउंटर पर सांसद -IPS कुंदन कृष्णन आमने-सामने, सुधाकर सिंह की शिकायत पर सीएम ने दिया जांच का हुक्म
Bharat Tiwari Encounter: बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डीजी कुंदन कृष्णन के बीच विवाद गहराता जा रहा है।
Bharat Tiwari Encounter: बिहार में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला अब सियासी और कानूनी तकरार के बीच पहुंच गया है। बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डीजी कुंदन कृष्णन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। बिहार में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला अब सियासी बयानबाजी से आगे बढ़कर कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डीजी कुंदन कृष्णन के बीच तनातनी लगातार बढ़ रही है। पांच करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस के बाद सांसद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को खत लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अब मुख्यमंत्री सचिवालय ने उनकी शिकायत पर जांच का हुक्म जारी कर दिया है।
मुख्यमंत्री सचिवालय के उप सचिव मोहम्मद इमरान ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर सांसद के आरोपों की पड़ताल करने और की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है। पत्र में भरत भूषण तिवारी की मौत की निष्पक्ष जांच, तत्कालीन पुलिस कमान की जवाबदेही तय करने और जनहित के मुद्दे उठाने पर भेजे गए मानहानि नोटिस से जुड़े मामले का जिक्र किया गया है।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर से जुड़ा है। घटना के बाद 24 जून को सुधाकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि पटना से गई एसटीएफ की टीम ने एनकाउंटर किया और तत्कालीन एसटीएफ प्रमुख कुंदन कृष्णन की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
इन बयानों के बाद कुंदन कृष्णन ने अपने वकील अपूर्व हर्ष के जरिए छह अक्टूबर को पांच करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा। नोटिस में आरोप लगाया गया कि सांसद के बयानों से उनकी पेशेवर साख और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। उनसे माफी मांगने की मांग भी की गई।
सुधाकर सिंह ने उठाया जवाबदेही का सवाल
सांसद ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि एनकाउंटर के वक्त कुंदन कृष्णन बिहार एसटीएफ के डीजी थे। इसलिए तत्कालीन पुलिस कमान, फैसले लेने की प्रक्रिया, अधिकारियों के बीच बातचीत और पुलिस मुख्यालय की भूमिका की निष्पक्ष पड़ताल जरूरी है। उनका कहना है कि किसी अधिकारी को ओहदे की बुनियाद पर जवाबदेही से छूट नहीं मिलनी चाहिए।
सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी गुहार लगाई है। उन्होंने मानहानि नोटिस भेजने के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत के सवाल की जांच कराने और मामले को संसद की विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का आग्रह किया है। सांसद का तर्क है कि जनता से जुड़े सवाल उठाना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
कुंदन कृष्णन भी अपने रुख पर कायम
दूसरी ओर, कुंदन कृष्णन ने कहा है कि कानूनी नोटिस भेजने के लिए गृह विभाग की अनुमति जरूरी नहीं है। उन्होंने नियमों का अध्ययन करने और वकील से मशविरा लेने के बाद नोटिस भेजने की बात कही। साथ ही सांसद के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर करने की तैयारी का भी संकेत दिया है।कुंदन कृष्णन के पक्ष के मुताबिक, घटना के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई थी और 20 जून 2026 को सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अगुवाई में न्यायिक जांच आयोग गठित किया गया था।
अब गृह विभाग की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। जांच का आदेश आरोपों की पुष्टि नहीं है। मामले की असल तस्वीर संबंधित तथ्यों और दोनों पक्षों के दावों की पड़ताल के बाद ही साफ होगी।