भोजपुर परिवहन घोटाला: 69 लाख कौन ले गया, ऑपरेटर जिम्मेदार!, तत्कालीन डीटीओ साहेब बचे या बचाए गए, पढ़िए भ्रष्टाचार की पूरी इनसाइड स्टोरी

Patna : भोजपुर जिला परिवहन कार्यालय के आरटीपीएस काउंटर पर वाहन मालिकों द्वारा जमा की गई करीब 69 लाख रुपये की टैक्स राशि सरकारी खाते से गायब है। इस सनसनीखेज गबन मामले में तत्कालीन डेटा ऑपरेटर अजय कुमार सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। हालांकि, इस घोटाले की आंच अब विभाग के रसूखदार अधिकारियों तक भी पहुँचने लगी है।

नवादा थाना में प्राथमिकी दर्ज: 69.11 लाख का गबन

भोजपुर जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) के आवेदन पर नवादा थाना में कांड संख्या- 43/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है。 डेटा ऑपरेटर अजय कुमार सिंह पर आरोप है कि उसने मोटर वाहन टैक्स के रूप में आरटीपीएस काउंटर पर संग्रहित कुल 69,11,698 रुपये की राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316 (4) और 318 (4) के तहत मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।

दो बार नोटिस के बाद भी नहीं दिया जवाब

गबन का खुलासा होने के बाद विभाग द्वारा आरोपी कर्मी अजय कुमार सिंह को 9 दिसंबर 2025 और 2 जनवरी 2026 को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया गया था। इसके बावजूद ऑपरेटर की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिसे विभाग ने राशि के गबन का पुख्ता प्रमाण माना और कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया। बता दें कि आरोपी को 3 सितंबर 2024 को टैक्स वसूली का प्रभार सौंपा गया था।

क्या अकेला ऑपरेटर कर सकता है इतना बड़ा खेल?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक अनुबंधित डेटा ऑपरेटर अकेले इतनी बड़ी राशि का गबन कर सकता है? नियमानुसार, टैक्स कलेक्शन की राशि प्रतिदिन नाजिर के माध्यम से सरकारी खजाने में जमा होनी चाहिए। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि जब महीनों तक लाखों रुपये जमा नहीं हो रहे थे, तब निगरानी का जिम्मा संभालने वाले तत्कालीन डीटीओ और नाजिर क्या कर रहे थे?

एसोसिएशन का आरोप: तत्कालीन डीटीओ की संलिप्तता

बिहार ट्रक ओनर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष अजय यादव ने इस गबन में तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी रवि रंजन प्रसाद और नाजिर विजय बाबू की संलिप्तता का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक अदना सा कर्मी अकेले इतना बड़ा घोटाला नहीं कर सकता। एसोसिएशन ने इस मामले की विशेष जांच के लिए भोजपुर एसपी को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

भ्रष्टाचार का खुला खेल और अफसरों की सुरक्षा

आरोप लग रहे हैं कि जब करोड़ों के घोटाले का खुलासा हुआ, तो विभाग ने एक अनुबंधित कर्मी पर केस दर्ज कर खुद को सुरक्षित कर लिया है। जिला परिवहन कार्यालय में टैक्स वसूली की निगरानी डीटीओ के पास होती है। यदि ऑपरेटर सरकारी पैसा जमा नहीं कर रहा था, तो यह विभागीय लापरवाही या मिलीभगत की ओर स्पष्ट इशारा करता है, जो अब जांच का मुख्य विषय है।

पुलिस जांच और भविष्य की कार्रवाई

नवादा थाना पुलिस अब इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि गबन की गई यह भारी-भरकम राशि कहां और किसके पास है। वहीं, विभाग में नए डीटीओ के आने के बाद पुरानी फाइलों को खंगाला जा रहा है। आने वाले दिनों में इस घोटाले में कुछ बड़े नामों का खुलासा होने की पूरी संभावना है।


धीरज पराशर की रिपोर्ट