एआई (AI) वाली खेती और 190 मॉडल गाँव, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स का बिछेगा जाल! : बिहार के कृषि बजट ने भविष्य की खेती का खींचा खाका
बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए 'संजीवनी' करार दिया है. इस बजट में न केवल 'एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर' को मजबूत करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश का रोडमैप तैयार किया गया
Patna - बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा प्रस्तुत बजट को किसान-हितैषी बताते हुए कहा कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करेगा। इस बजट में केवल फसलों के उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि उनके मूल्य संवर्धन (Value Addition), भंडारण और निर्यात के लिए 'बिहार एक्सीलेरेशन मिशन' जैसे क्रांतिकारी कदमों की घोषणा की गई है।
किसानों के लिए नई सम्मान निधि की घोषणा
राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की तर्ज पर 'जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना' शुरू करने का संकल्प लिया है। इसके अंतर्गत बिहार के किसानों को प्रतिवर्ष ₹3,000 की अतिरिक्त वित्तीय सहायता सीधे उनके खातों में प्रदान की जाएगी। यह कदम छोटे और सीमांत किसानों को खेती की लागत में राहत देने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर में ₹1 लाख करोड़ का निवेश
कृषि उत्पादों को खराब होने से बचाने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए 'बिहार एपी इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन' का गठन किया गया है। इसके तहत शुरुआती चरण में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का विशाल लक्ष्य रखा गया है। इस भारी-भरकम राशि से राज्य भर में छंटाई एवं ग्रेडिंग यूनिट, कोल्ड चेन चैम्बर्स, अत्याधुनिक गोदाम और प्रोसेसिंग सेंटरों की स्थापना की जाएगी।
उत्पादन में बिहार का 'देशव्यापी' डंका
कृषि मंत्री ने गर्व से बताया कि वर्ष 2024-25 में बिहार ने मखाना और लीची उत्पादन में पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। देश के कुल मखाना उत्पादन का 85 प्रतिशत अकेले बिहार में होता है। इसके अलावा मक्का में दूसरा, शहद में चौथा और चावल में पांचवां स्थान प्राप्त कर बिहार ने खाद्यान्न उत्पादन के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया है। मखाना उद्योग को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए 'राष्ट्रीय मखाना बोर्ड' का गठन भी किया गया है।
आधुनिक तकनीक और AI युक्त खेती पर जोर
बिहार की खेती को अब डिजिटल तकनीक से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए डिजिटल कृषि निदेशालय का गठन किया गया है। राज्य के सभी 38 जिलों में जलवायु अनुकूल कृषि के तहत 190 मॉडल कृषि गाँव विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही, खेती में मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए 91 प्रकार के यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दिया जा रहा है और जल्द ही AI युक्त यांत्रिक कृषि मिशन की शुरुआत की जाएगी।
एग्री-स्टार्टअप और जी.आई. (GI) उत्पादों को बाजार
बिहार को 'कृषि स्टार्टअप हब' के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। 'बिहार कृषि एक्सीलेरेशन मिशन' के माध्यम से जी.आई. टैग प्राप्त उत्पादों (जैसे जर्दालू आम, कतरनी चावल आदि) के लिए समर्पित बाजार उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा, राज्य के 53 कृषि उपज बाजार प्रांगणों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिनमें से 20 पहले ही ई-नाम (e-NAM) पोर्टल से जुड़ चुके हैं।
सात निश्चय-3: अगले 5 वर्षों का महा-लक्ष्य
सरकार ने वर्ष 2025-2030 के लिए उत्पादन को दोगुना से अधिक करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। दलहनी फसलों का उत्पादन 3.93 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 11.27 लाख मीट्रिक टन और सब्जियों का उत्पादन 180 लाख मीट्रिक टन से सीधे 360 लाख मीट्रिक टन करने का संकल्प लिया गया है। फलों के उत्पादन को भी 383 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 679 लाख मीट्रिक टन तक पहुँचाने का लक्ष्य है।
| फसल | वर्तमान उत्पादन (LMT) | लक्ष्य (2030) (LMT) |
| दलहन | 3.93 | 11.27 |
| तेलहन | 1.24 | 4.81 |
| मक्का | 66.02 | 133.05 |
| सब्जियां | 180.00 | 360.00 |
| फल | 383.91 | 679.19 |