बिहार में ‘टोपो लैंड’ पर बड़ी कार्रवाई, 14 जिलों में खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर रोक

टोपो लैंड वह जमीन होती है, जो नदियों के बहाव का रास्ता बदलने से बनती है। ऐसी भूमि का पुराने राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट खाता, खेसरा या सर्वे विवरण मौजूद नहीं होता।

Topo Land in Bihar - फोटो : news4nation

Topo Land : बिहार सरकार ने टोपो लैंड को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के 14 जिलों में टोपो लैंड की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और लगान निर्धारण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि टोपो लैंड पूरी तरह सरकारी भूमि मानी जाएगी और इस पर किसी निजी व्यक्ति का स्वामित्व स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही ऐसी जमीनों की रजिस्ट्री, म्यूटेशन और टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया भी रोक दी गई है।


सरकार ने यह निर्णय महाधिवक्ता और विधि विभाग की सलाह के आधार पर लिया है। विभाग ने 1935 के एक पुराने कानूनी निर्णय का हवाला देते हुए कहा है कि नदियों के मार्ग बदलने से बनी इस तरह की भूमि मूल रूप से सरकारी संपत्ति है।


क्या है टोपो लैंड?

टोपो लैंड वह जमीन होती है, जो नदियों के बहाव का रास्ता बदलने से बनती है। ऐसी भूमि का पुराने राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट खाता, खेसरा या सर्वे विवरण मौजूद नहीं होता। इसी कारण इन जमीनों के स्वामित्व को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई थी।


इन जिलों में लागू हुआ आदेश

सरकार का यह आदेश पटना, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, नालंदा, भोजपुर, सारण, सिवान, खगड़िया, गोपालगंज, बक्सर और पश्चिम चंपारण समेत 14 जिलों में लागू किया गया है।


जमीन खरीदने वालों के लिए चेतावनी

राजस्व विभाग ने लोगों को सतर्क करते हुए कहा है कि जमीन खरीदने से पहले उसकी श्रेणी और रिकॉर्ड की पूरी जांच जरूर करें। विभाग का मानना है कि बिना सत्यापन के टोपो लैंड की खरीद करने पर लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।