Bihar Politics: बिहार कांग्रेस में बजा बगावत का बिगुल! 8 सितंबर को दिल्ली में अपनों के खिलाफ धरना
Bihar Politics:बिहार कांग्रेस में विधानसभा चुनाव की करारी शिकस्त के बाद शुरू हुई अंदरूनी कलह अब खुली बगावत की शक्ल लेती दिख रही है। ...
Bihar Politics:बिहार कांग्रेस में विधानसभा चुनाव की करारी शिकस्त के बाद शुरू हुई अंदरूनी कलह अब खुली बगावत की शक्ल लेती दिख रही है। पार्टी के नाराज नेता अब बिहार में नहीं, बल्कि सीधे दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के दरवाजे पर दस्तक देने की तैयारी में हैं। 8 सितंबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन के बाहर धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया गया है।नाराज नेताओं की सबसे बड़ी मांग बिहार कांग्रेस प्रभारी महासचिव कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम को पद से हटाने की है। नेताओं ने इसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध बताया है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। पार्टी ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 6 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। इसके मुकाबले 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 71 सीटों पर चुनाव लड़कर 19 सीटें जीती थीं। यानी पांच साल में पार्टी की सीटों में भारी गिरावट आई।इस करारी शिकस्त के बाद प्रदेश संगठन के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे। अब वही नाराजगी सड़क से दिल्ली के पार्टी मुख्यालय तक पहुंचने वाली है।
धरना देने की तैयारी कर रहे नेताओं का आरोप है कि उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी शिकायतें रखीं, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।एआईसीसी सदस्य आनंद माधव के मुताबिक, 3 नवंबर 2025 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और अशोक गहलोत समेत राष्ट्रीय नेताओं के सामने बिहार कांग्रेस से जुड़ी शिकायतें रखी गई थीं। उस वक्त समस्याओं पर गौर करने और आगे कार्रवाई का भरोसा दिया गया था।नाराज नेताओं का दावा है कि इसके बाद उन्होंने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिलने का वक्त भी मांगा, लेकिन अब तक मुलाकात नहीं हो सकी। यही मुद्दा अब असंतुष्ट खेमे की नाराजगी को और हवा दे रहा है।
नाराज कांग्रेस नेताओं ने आंदोलन को सिर्फ एक दिन के धरने तक सीमित रखने के संकेत नहीं दिए हैं। अलग-अलग जिलों में कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें की जा रही हैं और ‘कृष्णा अल्लावरू हटाओ, कांग्रेस बचाओ’ जैसे नारे के साथ अभियान चलाने की बात सामने आई है।आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनका मकसद पार्टी को कमजोर करना नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं की शिकायतों को हाईकमान तक पहुंचाना है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस हाईकमान के सामने भी मुश्किल खड़ी कर दी है। एक तरफ बिहार संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद चल रही है। दूसरी तरफ पार्टी के भीतर ही नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ गया है।दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस का बिहार संगठन फिलहाल संगठन सृजन अभियान के जरिए प्रखंड और पंचायत स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अगस्त में पार्टी ने नए प्रखंड अध्यक्षों के लिए गांधीवादी तरीके से आंदोलन और जनसंपर्क की ट्रेनिंग भी शुरू की थी।लेकिन इसी दौरान पार्टी के भीतर से ही नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठना बताता है कि संगठन को बाहर से मजबूत करने की कोशिश के साथ अंदर की नाराजगी भी खत्म करनी होगी।
बिहार कांग्रेस के नाराज नेता फिलहाल अपनी आवाज दिल्ली तक पहुंचाने की तैयारी में हैं। उनका दावा है कि वे लंबे समय से अपनी शिकायतें पार्टी नेतृत्व के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो धरने का रास्ता चुनना पड़ा।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस हाईकमान 8 सितंबर से पहले नाराज नेताओं को बातचीत की मेज पर बुलाकर मामला शांत कर पाएगा, या फिर इंदिरा भवन के बाहर होने वाला धरना बिहार कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला देगा?बिहार कांग्रेस के लिए यह सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन की मांग नहीं है। यह उस गहरी बेचैनी का इजहार है, जो चुनावी हार के बाद संगठन के भीतर लगातार पकती रही और अब खुलकर बगावत के रूप में सामने आ रही है।