Bihar Legislative Council: 8 सीटों के चुनाव से पहले बड़ा सियासी खेल, अवधेश नारायण सिंह की कुर्सी पर संकट, JDU में इन नए नामों की चर्चा
Bihar Legislative Council:बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के चुनाव की घोषणा इसी महीने किसी भी वक्त हो सकती है। चुनावी सरगर्मी के बीच परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह के पद से हटने की चर्चा ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। ...
Bihar Legislative Council:बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के चुनाव की घोषणा इसी महीने किसी भी वक्त हो सकती है। चुनावी सरगर्मी के बीच परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह के पद से हटने की चर्चा ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। JDU सूत्रों के मुताबिक, उनके इस्तीफे को लेकर BJP और JDU की शीर्ष नेतृत्व के बीच सहमति बनने की बात कही जा रही है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, अवधेश नारायण सिंह की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी हो चुकी है। 31 अगस्त को वह दिल्ली पहुंचे थे, जहां गृह मंत्री से उनकी बातचीत हुई। इसके बाद उनकी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात हुई, लेकिन बताया जा रहा है कि सभापति पद को लेकर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी।
दरअसल, BJP-JDU गठबंधन में लंबे समय से यह राजनीतिक समीकरण रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष अगर एक दल का हो तो विधान परिषद का सभापति दूसरे दल से बनाया जाए। मौजूदा वक्त में दोनों महत्वपूर्ण पद BJP के नेताओं के पास हैं। 75 सदस्यीय विधान परिषद में BJP के 25, JDU के 20 और RJD के 15 सदस्य हैं। कांग्रेस के दो तथा अन्य दलों और निर्दलीयों की भी मौजूदगी है।
सभापति पद के संभावित दावेदारों में JDU MLC ललन सर्राफ का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। वह दूसरी बार परिषद सदस्य हैं और सदन में JDU के उपनेता भी हैं। लंबे समय से पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे सर्राफ को नीतीश कुमार और संजय झा का करीबी भरोसेमंद माना जाता है।
वहीं, उपसभापति रामवचन राय भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर राय JDU के बौद्धिक चेहरों में गिने जाते हैं। धानुक और EBC समुदाय से आने के कारण पार्टी सामाजिक समीकरण साधने के लिए उनके नाम पर भी दांव लगा सकती है।
इसके अलावा कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चार बार के MLC डॉ. संजीव कुमार सिंह के नाम की भी चर्चा है। अवधेश नारायण सिंह के राजपूत समाज से होने के कारण पार्टी इसी सामाजिक समीकरण को कायम रखने के लिए किसी दूसरे राजपूत नेता को मौका देने पर विचार कर सकती है। ऐसे में सभापति पद को लेकर JDU के भीतर कई स्तरों पर सियासी मंथन जारी है।