बिहार में थर्राया प्रशासनिक महकमा:3 महीने में 2 कार्यपालक अधिकारियों की हत्या,टेंडर-ठेके और निर्माण कार्य बन रहे कारण!
बिहार में 3 महीनों में नगर परिषद के 2 कार्यपालक अधिकारियों की हत्या से प्रशासनिक तंत्र स्तब्ध है। औरंगाबाद में विमल कुमार और भागलपुर में कृष्ण भूषण प्रसाद हत्याकांड के पीछे के कारणों व सुरक्षा पर उठ रहे सवालों की विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें।
बिहार में बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते तीन महीनों के भीतर नगर परिषद के दो कार्यपालक अधिकारियों की हत्या से पूरे प्रशासनिक महकमे में दहशत और आक्रोश का माहौल है। सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने और विकास कार्यों की पारदर्शी निगरानी करने वाले अधिकारी अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इन सिलसिलेवार घटनाओं ने जहां प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है, वहीं राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
औरंगाबाद में कार्यपालक अधिकारी विमल कुमार की हत्या
ताजा मामला औरंगाबाद जिले के बारुण थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की देर रात निर्मम हत्या कर दी गई। विमल कुमार सरकारी कार्य निपटाकर पटना लौट रहे थे, तभी धनौती पुल के पास उनकी कार में उन पर हमला हुआ। पुलिस जांच में उनके वाहन चालक मिथिलेश की संलिप्तता सामने आई, जिसने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी चालक के अनुसार, उसने काम के अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव के कारण गाड़ी में रखी लोहे की रॉड से अधिकारी के सिर पर वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
सुल्तानगंज नगर परिषद दफ्तर के भीतर खूनी वारदात
औरंगाबाद की इस घटना ने कुछ महीने पहले भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में हुई ऐसी ही एक सनसनीखेज वारदात की यादें ताजा कर दी हैं। सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक अधिकारी कृष्ण भूषण प्रसाद की हत्या अपराधियों ने कार्यालय के भीतर घुसकर मुख्य पार्षद के चेंबर में गोलियां बरसाकर कर दी थी। इलाज के लिए अस्पताल ले जाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया था। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रामधनी यादव को मुठभेड़ में मार गिराया था, लेकिन इस वारदात ने सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया था।
टेंडर, ठेके और विकास कार्यों का बढ़ता दबाव
नगर निकायों में तैनात कार्यपालक अधिकारियों पर करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं, टेंडरों और निर्माण कार्यों का सीधा नियंत्रण होता है। ऐसे में पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से काम करने वाले अधिकारियों को अक्सर स्थानीय राजनीतिक और आपराधिक तत्वों के दबाव का सामना करना पड़ता है। प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि बढ़ते तनाव और संवेदनशील जिम्मेदारियों के बीच अधिकारियों को सुरक्षा का अभाव झेलना पड़ रहा है। हालांकि, औरंगाबाद मामले में पुलिस फिलहाल सभी कानूनी व आपराधिक पहलुओं की जांच कर रही है।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग और राजनीतिक सरगर्मी
लगातार दो अधिकारियों की हत्या के बाद बिहार में प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। अधिकारी संगठनों ने सरकार से कार्यस्थल और यात्रा के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इन घटनाओं को आधार बनाते हुए राज्य सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों में व्याप्त इस भय के माहौल को समाप्त करना राज्य प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।