अब डायल-112 पर पुलिस की भी होगी निगरानी! मोबाइलबाज़ी पर DGP का शिकंजा, बॉडी कैमरा-डैश कैमरा से हर हरकत होगी कैद

Bihar Dial 112: लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कि डायल-112 की गाड़ियों में तैनात कुछ पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं और अपनी जिम्मेदारियों में लापरवाही बरतते हैं, अब पुलिस मुख्यालय ने ऐसे मामलों पर शिकंजा कसने को तैयार है..

अब डायल-112 पर पुलिस की भी होगी निगरानी! - फोटो : social Media

Bihar Dial 112: बिहार में आपातकालीन पुलिस सेवा डायल-112 को और ज्यादा हाईटेक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कि डायल-112 की गाड़ियों में तैनात कुछ पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं और अपनी जिम्मेदारियों में लापरवाही बरतते हैं, अब पुलिस मुख्यालय ने ऐसे मामलों पर शिकंजा कसने की बड़ी तैयारी कर ली है।

पुलिस मुख्यालय ने डीजीपी विनय कुमार को प्रस्ताव भेजा है, जिसके तहत डायल-112 के सभी वाहनों में डैश कैमरे और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की वर्दी पर बॉडी-वॉर्न कैमरे लगाए जाएंगे। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मुख्यालय से ही हर वाहन की लोकेशन और पुलिसकर्मियों की गतिविधियों पर लाइव नजर रखी जा सकेगी। इससे यह भी रिकॉर्ड होगा कि किसी सूचना पर पुलिस कितनी देर में पहुंची और मौके पर उसकी कार्रवाई कैसी रही।

पुलिस विभाग अब तकनीक के सहारे अपराध पर भी पहले से ज्यादा पैनी नजर रखने की तैयारी में है। डायल-112 पर आने वाली शिकायतों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए विश्लेषण किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि किस थाना क्षेत्र में किस तरह के अपराध सबसे ज्यादा हो रहे हैं। इसी आधार पर संवेदनशील इलाकों की पहचान कर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, गश्त बढ़ाने और प्रो-एक्टिव पुलिसिंग की रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि वारदात होने से पहले ही उस पर अंकुश लगाया जा सके।

डायल-112 का दायरा भी अब और बड़ा होने जा रहा है। इसे एनएचएआई, रेलवे, परिवहन विभाग, निजी एंबुलेंस, ट्रॉमा सेंटर और स्मार्ट सिटी के इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (ICCC) से जोड़ा जाएगा। साथ ही स्मार्ट सिटी के इमरजेंसी कॉल बॉक्स भी इसी नेटवर्क से लिंक होंगे, जिससे आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य और तेज हो सकेगा।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, डायल-112 के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 7,500 नागरिकों को आपातकालीन सहायता मिल रही है और सेवा का औसत रिस्पांस टाइम 10 मिनट है। पिछले चार वर्षों में 60 लाख से अधिक लोगों को पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस, हाईवे पेट्रोलिंग तथा महिला एवं बाल सहायता जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा शिकायतें स्थानीय विवाद और मारपीट से जुड़ी रही हैं, जबकि घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटनाओं और अगलगी की घटनाओं में भी डायल-112 ने त्वरित सहायता पहुंचाई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने और जवाबदेही पहले से अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

रिपोर्ट- कुलदीप भारद्वाज