Bihar Food Safety: बिहार में शुद्ध के लिए महायुद्ध, सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर खाद्य सुरक्षा आयुक्त कुमार रवि का बरस रहा है हंटर, मिलावटखोरों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई से हड़कंप

Bihar Food Safety : बिहार की पावन भूमि पर इन दिनों खाने-पीने की चीजों में मिलावट करने वालों और अस्वच्छ माहौल में कारोबार चलाने वाले रेस्टोरेंट संचालकों की नींद उड़ी हुई है। ...

सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा- फोटो : X

Bihar Food Safety : बिहार की पावन भूमि पर इन दिनों खाने-पीने की चीजों में मिलावट करने वालों और अस्वच्छ माहौल में कारोबार चलाने वाले रेस्टोरेंट संचालकों की नींद उड़ी हुई है। राज्यभर में खाद्य सुरक्षा विभाग  ने पूरी मुस्तैदी और आक्रामकता के साथ एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है। इस उच्चस्तरीय कार्रवाई का श्रेय एक सुनियोजित प्लानिंग को जाता है, जिसके पीछे बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और 2005 बैच के तेजतर्रार आईएएस अधिकारी व खाद्य सुरक्षा आयुक्त कुमार रवि का कुशल नेतृत्व काम कर रहा है।

पूरे सूबे में ताबड़तोड़ छापेमारी, लाखों का माल जब्त

सरकारी आंकड़ों के गवाह हैं कि पिछले तीन महीनों के भीतर बिहार के सभी 38 जिलों में कुल 531 संवेदनशील ठिकानों पर औचक निरीक्षण किए गए हैं। इस दौरान मिलावटी और एक्सपायर्ड खाद्य उत्पादों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए करीब 17.32 लाख रुपये के सामान को या तो तत्काल जब्त किया गया या मौके पर नष्ट कर दिया गया।

प्रमुख शहरों में दबिश: राजधानी पटना में सबसे अधिक 87 जगहों पर जांच की गई। इसके अलावा रोहतास में 41, सारण में 40 और गोपालगंज में 37 स्थानों पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीमें पहुंचीं।

ऑनलाइन गोदामों और नामी होटलों पर कार्रवाई: हाल ही में 22 अक्टूबर को पटना स्थित ब्लिंकिट के एक गोदाम से 40 लीटर एक्सपायर्ड अमूल दूध की खेप पकड़ी गई जिसे नष्ट किया गया। इसके अलावा हाजीपुर के एक होटल की रसोई में भारी गंदगी और कॉकरोच मिलने पर उसका लाइसेंस ही निलंबित कर दिया गया।

बिरयानी आउटलेट्स पर शिकंजा: पटना के आशियाना-दीघा रोड स्थित 'बिरयानी महल' से हाफ-बॉइल्ड चिकन, वेज आइटम और उबला हुआ मटन जब्त किया गया। वहीं एसके पुरी और बोरिंग रोड स्थित 'बिरयानी बूल्ज़' व 'बिरयानी महल' में बिना मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट, वाटर टेस्टिंग रिपोर्ट और पेस्ट कंट्रोल के अवैध रूप से कारोबार चलाने का मामला सामने आया, जहां से चिकन मसाला और कच्चे मटन के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।

कौन हैं IAS कुमार रवि?

मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले कुमार रवि अपनी अकादमिक और प्रशासनिक उत्कृष्टता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने साल 2001 में देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी (IIT प्रवेश परीक्षा में उनकी ऑल इंडिया रैंक 142 थी)। कुछ समय तक बतौर इंजीनियर काम करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा का रुख किया।साल 2003 की परीक्षा में वे भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए चुने गए और आयकर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर रहे।इसके बाद 2005 बैच की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 10वीं रैंक हासिल कर IAS का पद प्राप्त किया।

साल 2008 में सुपौल के जिलाधिकारी के रूप में उन्होंने भीषण कोसी बाढ़ के दौरान राहत कार्यों को मुस्तैदी से संभाला था। दरभंगा और पटना के डीएम के रूप में अतिक्रमण हटाने व ट्रैफिक सुधार जैसे कठिन कार्यों में उनका योगदान बेहद सराहनीय रहा। उनके उत्कृष्ट प्रशासनिक कार्यों को देखते हुए 2020 में IIT कानपुर ने उन्हें प्रतिष्ठित 'सत्येंद्र के. दुबे मेमोरियल अवॉर्ड' से सम्मानित किया था।

पारदर्शी व्यवस्था और अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण

इस अभियान को महज औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए, खाद्य सुरक्षा आयुक्त कुमार रवि ने मैदानी स्तर के अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की है। इसके तहत अधिकारियों को 14 दिन की बुनियादी ट्रेनिंग और 26 दिन की ऑन-जॉब ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ ही, यह अनिवार्य किया गया है कि अधिकारी रोजाना अपनी जांच रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करें और शिकायतों पर बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

इसी वर्ष मई माह से स्वास्थ्य सचिव के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे कुमार रवि का मुख्य ध्येय सिर्फ जुर्माना वसूलना या सामान जब्त करना नहीं है, बल्कि बिहार के प्रत्येक नागरिक की थाली तक सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक भोजन पहुंचाना है। इस निरंतर चलने वाले अभियान से मिलावटखोरों के मन में गहरा खौफ पैदा हो गया है।

रिपोर्ट- पुष्कर प्रवीण