Bihar Exam Reform: लाखों अभ्यर्थियों के लिए राहत की खबर, बिहार सरकार ने परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति का किया ऐलान, इनको मिली कमान
Bihar Exam Reform: बिहार में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार ने एक अहम और दूरगामी कदम उठाया है।
Bihar Exam Reform: बिहार में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार ने एक अहम और दूरगामी कदम उठाया है। आए दिन परीक्षा संचालन, पारदर्शिता, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और अभ्यर्थियों की सुविधा से जुड़े सवालों के बीच सरकार ने परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस कमेटी की कमान पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति हरीश कुमार को सौंपी गई है। सरकार का मकसद परीक्षा व्यवस्था की खामियों को चिन्हित कर उसे ज्यादा पारदर्शी, मुस्तैद और भरोसेमंद बनाना है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने 1 सितंबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। समिति राज्य में अलग-अलग परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों और भर्ती एजेंसियों की ओर से आयोजित होने वाली प्रतियोगी एवं नियुक्ति परीक्षाओं की मौजूदा प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। इसके बाद परीक्षा संचालन को बेहतर बनाने के लिए जरूरी सुझाव सरकार को सौंपे जाएंगे।
दरअसल, परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष के चयन की कवायद कुछ दिन पहले शुरू हुई थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने 24 अगस्त 2026 को पटना हाईकोर्ट के महाधिवक्ता से समिति के अध्यक्ष के लिए हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश के नाम की अनुशंसा करने का अनुरोध किया था।इसके बाद 28 अगस्त 2026 को पटना हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति हरीश कुमार के नाम की अनुशंसा की। हाईकोर्ट से मिली इस सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार ने उन्हें परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष अधिसूचित कर दिया।
बिहार में हर साल बड़ी तादाद में अभ्यर्थी विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते हैं। BPSC, BPSSC, बिहार पुलिस भर्ती बोर्ड, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, विश्वविद्यालयों और दूसरी भर्ती एजेंसियों की ओर से अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।इन परीक्षाओं की व्यापकता को देखते हुए समिति के सामने कई अहम पहलू होंगे। परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था से लेकर अभ्यर्थियों की सहूलियत, तकनीकी इंतजाम, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा संचालन और निगरानी जैसे मुद्दों पर गहन समीक्षा की जा सकती है।
सरकार की कोशिश है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर ऐसी खामी न रहे, जिससे अभ्यर्थियों के बीच अविश्वास पैदा हो। खास तौर पर प्रश्नपत्र की गोपनीयता और सुरक्षा को मजबूत करना अहम मुद्दा हो सकता है। इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने और तकनीकी प्रणाली को ज्यादा कारगर बनाने पर भी समिति सुझाव दे सकती है।बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में हर साल लाखों युवा अपना भविष्य आजमाते हैं। ऐसे में परीक्षा की तारीख, केंद्र, प्रश्नपत्र, तकनीकी व्यवस्था और परिणाम तक पूरी प्रक्रिया का पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। सरकार द्वारा गठित यह विशेषज्ञ समिति अगर मौजूदा व्यवस्था की कमियों को प्रभावी तरीके से सामने लाती है तो आने वाले दिनों में परीक्षा संचालन के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।फिलहाल न्यायमूर्ति हरीश कुमार के नेतृत्व में गठित समिति से उम्मीद की जा रही है कि वह परीक्षा व्यवस्था के हर अहम पहलू की पड़ताल करेगी और ऐसी सिफारिशें देगी, जिससे परीक्षाओं की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और निष्पक्षता और मजबूत हो सके। अब निगाहें समिति की आगामी बैठकों और उसकी सिफारिशों पर टिकी हैं।
रिपोर्ट- कुलदीप भारद्वाज