बेतिया राज की जमीन पर नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, इस साल से पहले कब्जा करनेवालों को मिलेगा मालिकाना हक, यह होंगे बेदखल
बिहार सरकार ने बेतिया राज की 24,477 एकड़ जमीन के लिए नई नियमावली जारी की है। 1 जनवरी 1986 के पहले के कब्जेदारों को मालिकाना हक मिलेगा, जबकि 40 वर्ष से कम के अवैध कब्जे हटाए जाएंगे।
Patna - बिहार सरकार ने बेतिया राज की संपत्तियों के प्रबंधन और अवैध कब्जे को मुक्त कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा तैयार नई नियमावली के तहत, 40 वर्ष से कम समय से कब्जा जमाए लोगों को अवैध मानते हुए उन्हें बेदखल करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उपमुख्यमंत्री सह भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि सरकार का लक्ष्य हजारों एकड़ बेशकीमती जमीन को अतिक्रमण मुक्त कर उनका बेहतर प्रबंधन करना है।
1 जनवरी 1986 से पहले के कब्जेदारों को राहत
सरकार ने लंबे समय से रह रहे लोगों के मानवीय पक्ष का ध्यान रखते हुए कट-ऑफ तिथि निर्धारित की है। 1 जनवरी 1986 से पहले से कब्जा जमाए हुए लोग, जिनके पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें राहत दी गई है। यदि ऐसे अधिभोगी निर्धारित सरकारी शुल्क जमा करते हैं, तो उन्हें उस जमीन का पूर्ण स्वामित्व (Ownership) मिल सकेगा। यह प्रावधान उन हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत है जो दशकों से बेतिया राज की जमीन पर बसे हुए हैं।
24 हजार एकड़ से अधिक जमीन पर होगी कार्रवाई
बेतिया राज की कुल 24,477.14 एकड़ जमीन इस नई नियमावली के दायरे में आएगी। यह विशाल भू-भाग न केवल बिहार के विभिन्न जिलों में बल्कि उत्तर प्रदेश में भी फैला हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक जमीन पश्चिम चम्पारण (16,671.91 एकड़) और पूर्वी चम्पारण (7,640.91 एकड़) में स्थित है। इसके अलावा सारण, सिवान, गोपालगंज और पटना जिलों में भी बेतिया राज की संपत्तियां मौजूद हैं, जिन्हें अब व्यवस्थित किया जाएगा।
दो साल के इंतजार के बाद नियमावली तैयार
गौरतलब है कि बेतिया राज की संपत्तियों से जुड़ा विधेयक दो साल पहले ही विधानमंडल से पारित हो चुका था। अब सरकार ने इसके कार्यान्वयन के लिए विस्तृत नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया है। इसमें भूमि के वर्गीकरण, प्रबंधन, कब्जे की प्रक्रिया और अपील के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। संपत्तियों को ऐतिहासिक विरासत, सरकारी कब्जे वाली भूमि और वैध पट्टाधारकों जैसी विभिन्न श्रेणियों में बांटा जाएगा।
90 दिनों में आपत्तियों का होगा निपटारा
अधिसूचना जारी होने के बाद संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, जिस पर इच्छुक पक्षकार 60 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। इन आपत्तियों की सुनवाई के लिए जिला स्तर पर विशेष पदाधिकारी नामित किए जाएंगे, जिन्हें सिविल न्यायालय जैसी शक्तियां प्राप्त होंगी। नियमावली में यह अनिवार्य किया गया है कि किसी भी विवाद या आपत्ति का निपटारा अधिकतम 90 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
समाहर्ता के पास होगा संपत्ति का कब्जा
सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने या निर्धारित समय में कोई आपत्ति प्राप्त न होने की स्थिति में, संबंधित जिले के समाहर्ता (DM) संपत्ति का प्रभावी कब्जा लेंगे। बिना किसी दस्तावेज के अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ इस नियमावली के तहत कड़ी बेदखली की कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल भूमि विवाद कम होंगे, बल्कि राज्य की बहुमूल्य संपत्तियों का उपयोग जनहित में किया जा सकेगा।