अधिकारियों ने सीएम नीतीश के ड्रीम प्रोजेक्ट पर फेरा पानी, टाइम पूरा होने के बाद भी लक्ष्य से रह गए पीछे, अब आनन फानन में बुलाई बैठक
बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना की धीमी प्रगति पर 13 अप्रैल को समीक्षा बैठक बुलाई है। लक्ष्य के मुकाबले 1.43 लाख लाइटों का काम अभी बाकी है।
Patna - बिहार में ग्रामीण इलाकों को सौर ऊर्जा से रोशन करने वाली 'मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना' की समीक्षा अब उच्च स्तर पर होगी। पंचायती राज विभाग ने लक्ष्य के मुकाबले कम काम होने पर नाराजगी जाहिर की है। विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ललित राही द्वारा जारी 'अत्यावश्यक' पत्र के अनुसार, योजना के चौथे और अंतिम चरण को मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य था, लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बाद भी लाखों लाइटों का अधिष्ठापन बाकी है।
लक्ष्य से पीछे छूटी कार्यान्वयन एजेंसियां
आंकड़ों के अनुसार, पूरे बिहार में कुल 11,73,740 सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, 31 मार्च 2026 की समयसीमा बीतने तक राज्य में मात्र 10,29,950 लाइटें ही लगाई जा सकी हैं। इसका सीधा अर्थ है कि करीब 1,43,790 लाइटें अब भी अधिष्ठापित होनी शेष हैं। कार्य की इसी धीमी प्रगति को देखते हुए विभाग ने अब कड़ा रुख अख्तियार किया है।
13 अप्रैल को ब्रेडा और CMS एजेंसी की बड़ी बैठक
योजना की प्रगति और 'केन्द्रीयकृत अनुश्रवण प्रणाली' (CMS) की समीक्षा के लिए 13 अप्रैल 2026 को दोपहर 3:00 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। पंचायती राज विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक विभागीय सभा कक्ष में आयोजित होगी। इस बैठक में ब्रेडा (BREDA) के अधिकारियों के साथ-साथ सभी कार्यान्वयन एजेंसियों के प्रमुखों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
CMS एजेंसी को 'प्रेजेंटेशन' के साथ भौतिक उपस्थिति का निर्देश
योजना की निगरानी के लिए जिम्मेदार CMS एजेंसी M/s Amnex Infotechnologies Pvt. Ltd. के प्रमुख को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे अद्यतन प्रगति प्रतिवेदन (Latest Progress Report) और प्रजेंटेशन के साथ बैठक में भौतिक रूप से शामिल हों। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि तकनीकी स्तर पर योजना की मॉनिटरिंग में क्या बाधाएं आ रही हैं और लक्ष्य प्राप्ति में देरी का मुख्य कारण क्या है।
जवाबदेही होगी तय
इस बैठक के माध्यम से विभाग पेंडिंग कार्यों को पूरा करने की नई समयसीमा तय कर सकता है। साथ ही, लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई की गाज भी गिर सकती है। विभाग ने इस बैठक को 'अत्यावश्यक' श्रेणी में रखा है, जिससे साफ है कि मुख्यमंत्री की इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने में किसी भी प्रकार की कोताही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।