Bihar Ration Card:बिहार में 35 लाख से ज्यादा राशन कार्ड रद्द! चेक कर लीजिए लिस्ट में आपका नाम भी तो नहीं

Bihar Ration Card: बिहार में राशन कार्ड और जन वितरण प्रणाली को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। ...

बिहार में राशन कार्ड का बड़ा खेल उजागर- फोटो : X

Bihar Ration Card: बिहार में राशन कार्ड और जन वितरण प्रणाली को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। राज्य में नए राशन कार्ड बनवाने के लिए अब तक 13 लाख 93 हजार 704 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 7 लाख 40 हजार 925 पात्र परिवारों को नए राशन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इन कार्डों के माध्यम से 14 लाख 61 हजार 286 नए सदस्यों को खाद्य सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा गया है। शेष आवेदनों के निष्पादन की प्रक्रिया जारी है।राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बिहार में फिलहाल 2 करोड़ 9 लाख राशन कार्डों के माध्यम से लगभग 8.45 करोड़ लोगों को लाभ मिल रहा है। वहीं, राज्य में 1.85 करोड़ राशन कार्डों पर खाद्यान्न का वितरण किया जा रहा है। सरकार की ओर से राशन कार्ड से संबंधित आवेदनों, ई-केवाईसी, खाद्यान्न वितरण और शिकायतों के निपटारे की लगातार समीक्षा की जा रही है।

35 लाख से अधिक राशन कार्ड रद्द करने की कार्रवाई

राशन कार्डों के सत्यापन के दौरान संदिग्ध कार्डों का मामला भी सामने आया। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने बिहार को संदिग्ध श्रेणी के 57 लाख 1 हजार राशन कार्डों से संबंधित डेटा उपलब्ध कराया था। इस डेटा को सत्यापन के लिए सभी अनुमंडल पदाधिकारियों के लॉगिन में उपलब्ध कराया गया।

सत्यापन के दौरान 17 लाख 69 हजार राशन कार्ड सही पाए गए, जबकि 35 लाख 36 हजार राशन कार्डों को रद्द करने की कार्रवाई की गई। इस प्रक्रिया का उद्देश्य वास्तविक और पात्र लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करना तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में संभावित गड़बड़ियों पर अंकुश लगाना है।

6.54 करोड़ लाभुकों का ई-केवाईसी पूरा

राज्य में राशन कार्डधारियों की पहचान सुनिश्चित करने और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया भी जारी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बिहार में 6.54 करोड़ लाभुकों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। यह कुल लाभुकों का लगभग 80.07 प्रतिशत है।इस व्यवस्था का उद्देश्य लाभार्थियों की पहचान का सत्यापन करना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना है। इसके साथ ही सरकार संदिग्ध राशन कार्डों की भी जांच कर रही है, ताकि अपात्र लोगों के नाम पर खाद्यान्न वितरण को रोका जा सके।

दूसरे राज्यों में भी राशन ले रहे बिहार के लाभुक

वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना के तहत लाभुक देश के किसी भी हिस्से में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार अपना राशन प्राप्त कर सकते हैं। अक्टूबर 2026 में बिहार के 3.65 लाख राशन कार्डधारियों ने दूसरे राज्यों में खाद्यान्न प्राप्त किया। इससे दूसरे राज्यों में काम करने वाले प्रवासी परिवारों को अपने वर्तमान निवास स्थान पर ही सरकारी राशन का लाभ लेने की सुविधा मिल रही है। इन आंकड़ों की जानकारी सोमवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में दी गई। बैठक में राशन कार्ड, जन वितरण प्रणाली की दुकानों, शिकायतों और संदिग्ध कार्डों के सत्यापन से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई।

4,910 राशन दुकानों के लिए आए 50 हजार से अधिक आवेदन

बिहार में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानों से जुड़ी रिक्तियों और अनुज्ञप्ति जारी करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा हुई। राज्य में राशन दुकानों की 4,910 रिक्तियों के विरुद्ध लाइसेंस जारी करने के लिए विज्ञापन निकाला गया था। इसके जवाब में 50,031 आवेदन प्राप्त हुए।इनमें से अब तक 1,237 राशन दुकानों के लिए पात्र आवेदकों को अनुज्ञप्ति जारी की जा चुकी है। शेष आवेदनों का समयबद्ध तरीके से निष्पादन करने और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले आवेदकों को नियमानुसार लाइसेंस जारी करने का निर्देश दिया गया है।राशन दुकानों की रिक्तियों को भरने से जन वितरण प्रणाली के संचालन को बेहतर बनाने और खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को सुचारु करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

4,069 शिकायतों में से 3,383 का निपटारा

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में प्राप्त शिकायतों के निवारण की भी समीक्षा की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 4,069 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 3,383 शिकायतों का निष्पादन किया जा चुका है। यह कुल शिकायतों का 83.14 प्रतिशत है।शिकायतों का त्वरित और प्रभावी निवारण सुनिश्चित करने के लिए विभाग में फ्लाइंग स्क्वाड गठित करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी मजबूत करना, अनियमितताओं पर नजर रखना और शिकायतों के समाधान में तेजी लाना है।

बिहार में राशन कार्ड जारी करने से लेकर ई-केवाईसी, दुकान आवंटन और शिकायत निवारण तक कई स्तरों पर काम चल रहा है। सरकार के सामने अब लंबित आवेदनों का निपटारा करने, पात्र लाभुकों तक खाद्यान्न पहुंचाने और जन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने की चुनौती है।