Bihar MLC Election 2026: बिहार MLC चुनाव में कैसे होती है वोटिंग और मतगणना? जानिए पहली, दूसरी वरीयता का नियम और कब रद्द होगा आपका वोट

Bihar MLC Election 2026: बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तरह इस चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि मतदाता बैलेट पेपर के जरिए अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं।...

बिहार MLC चुनाव में कैसे होती है वोटिंग और मतगणना? - फोटो : X

Bihar MLC Election 2026:  बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तरह इस चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि मतदाता बैलेट पेपर के जरिए अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। हालांकि, विधान परिषद के इन स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की प्रक्रिया सामान्य चुनावों से अलग है। यहां मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार प्राथमिकता देते हैं और मतगणना भी निर्धारित नियमों के तहत की जाती है।इस चुनाव में मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार के सामने अंक में ‘1’ लिखकर पहली वरीयता दर्ज करते हैं। इसके बाद चाहें तो दूसरे उम्मीदवार के सामने ‘2’ और तीसरे उम्मीदवार के सामने ‘3’ लिख सकते हैं। हालांकि, मतपत्र को सही तरीके से भरना बेहद जरूरी है, क्योंकि नियमों का उल्लंघन होने पर वोट अमान्य हो सकता है।

पहली वरीयता के वोट से शुरू होती है मतगणना

मतगणना के दौरान सबसे पहले उम्मीदवारों को मिले पहली वरीयता के मतों की गिनती की जाती है। इसके बाद संबंधित चुनाव के लागू नियमों के अनुसार विजेता तय किया जाता है।वरीयता आधारित मतदान में दूसरी या अगली वरीयता के मतों का इस्तेमाल हर स्थिति में सीधे पहली वरीयता के वोट की तरह नहीं किया जाता। यदि किसी उम्मीदवार को निर्धारित जीत का कोटा पहली गिनती में नहीं मिलता, तो लागू नियमों के मुताबिक आगे की गणना की जाती है।विधान परिषद के इन चुनावों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतगणना के नियमों को समझना जरूरी है। मतगणना में मतों का स्थानांतरण और जीत का कोटा संबंधित चुनाव नियमों के अनुसार तय होता है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर सीट पर दूसरी वरीयता के दो वोट मिलकर एक वोट बन जाते हैं।

पहली वरीयता से जीत नहीं मिली तो क्या होगा?

यदि पहली वरीयता की गिनती में कोई उम्मीदवार निर्धारित जीत का कोटा हासिल नहीं कर पाता, तो आगे की प्रक्रिया लागू चुनाव नियमों के अनुसार चलती है। वरीयता आधारित मतगणना में कम मत पाने वाले उम्मीदवार को बाहर करने और उसके मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयताओं पर विचार करने की प्रक्रिया हो सकती है।

उदाहरण के लिए, किसी सीट पर A, B, C और D चार उम्मीदवार हैं। यदि पहली वरीयता के मतों में कोई भी उम्मीदवार जीत का जरूरी कोटा हासिल नहीं करता, तो मतगणना के अगले चरण में नियमों के अनुसार अगली वरीयताओं पर विचार किया जा सकता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाताओं की प्राथमिकताओं के आधार पर विजेता निर्धारित करना है।

हालांकि, मतों के स्थानांतरण, जीत के कोटे और अंतिम परिणाम की घोषणा की सटीक प्रक्रिया संबंधित निर्वाचन क्षेत्र पर लागू नियमों से तय होगी। इसलिए मतगणना के बारे में किसी एक सामान्य नियम को सभी प्रकार के विधान परिषद चुनावों पर लागू नहीं मानना चाहिए।

किन गलतियों से वोट हो सकता है अमान्य?

बैलेट पेपर भरते समय मतदाताओं को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।अपनी पहली पसंद के उम्मीदवार के सामने अंक में 1 लिखें।दूसरी पसंद देना चाहते हैं तो दूसरे उम्मीदवार के सामने अंक में 2 लिखें।तीसरी पसंद देना चाहते हैं तो तीसरे उम्मीदवार के सामने अंक में 3 लिखें।प्राथमिकता के अंक शब्दों में लिखने या अंक की जगह उम्मीदवार का नाम लिखने से बचें।एक ही प्राथमिकता अंक दो अलग-अलग उम्मीदवारों के सामने न लिखें।बैलेट पेपर पर अंगूठे का निशान या फिंगरप्रिंट लगाने के बजाय निर्धारित तरीके से प्राथमिकता दर्ज करें।मतपत्र पर ऐसी अतिरिक्त लिखावट या निशान न बनाएं, जिससे मतदाता की पहचान उजागर हो सकती है या मतपत्र निर्धारित नियमों के विरुद्ध हो जाए। ध्यान रखें कि मतपत्र अमान्य होने के आधार चुनाव नियमों में निर्धारित हैं। किसी विशेष गलती पर मतपत्र रद्द होगा या नहीं, इसका निर्णय संबंधित नियमों और निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों के अनुसार किया जाता है।

मतदाताओं के लिए जरूरी बात

बिहार विधान परिषद चुनाव में मतदान करते समय सबसे अहम बात यह है कि मतदाता बैलेट पेपर पर अपनी प्राथमिकता सही ढंग से दर्ज करें। पहली पसंद के लिए ‘1’ लिखना और आगे की पसंद के लिए क्रमशः ‘2’, ‘3’ जैसे अंक लिखना जरूरी है। दूसरी और तीसरी वरीयता देना मतदाता की इच्छा पर निर्भर करता है, लेकिन मतपत्र भरने के सभी निर्देशों का पालन करना चाहिए।मतदान से पहले निर्वाचन अधिकारी की ओर से दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें। इससे मतपत्र में गलती होने की आशंका कम होगी और आपका मत निर्धारित नियमों के अनुरूप दर्ज हो सकेगा।