Bihar Salary Scam: बिहार में वेतन घोटाले का नया खुलासा, PHED में इन दो अधिकारियों ने गलत तरीके से निकाला परिवहन भत्ता, चपरासी से अभियंता प्रमुख तक का होगी जांच

Bihar Salary Scam: बिहार के सरकारी महकमों में वेतन और भत्तों की कथित गड़बड़ियों का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है।

बिहार में वेतन घोटाले का नया खुलासा- फोटो : X

Bihar Salary Scam: बिहार के सरकारी महकमों में वेतन और भत्तों की गड़बड़ियों का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। अब लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग  भी जांच के घेरे में आ गया है। विश्वेश्वरैया भवन स्थित विभागीय मुख्यालय की शुरुआती जांच में दो अधिकारियों द्वारा गलत तरीके से परिवहन भत्ता निकासी का मामला सामने आने की बात कही गई है। इस खुलासे के बाद महालेखाकार (AG) कार्यालय ने राज्यभर में विभाग के वेतन और भत्तों की व्यापक जांच की तैयारी शुरू कर दी है। जांच का दायरा चपरासी से लेकर शीर्ष अभियंताओं तक पहुंच सकता है।

मुख्यालय में दो अधिकारियों से जुड़ी गड़बड़ियों के सुराग मिलने के बाद अब जिलों के कार्य प्रमंडलों के वित्तीय रिकॉर्ड भी जांच के निशाने पर हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि विभिन्न कार्यालयों के दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल की गई, तो वेतन और भत्तों की निकासी में और अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। हालांकि, अभी पूरे विभाग में घोटाले की व्यापकता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

दो अधिकारियों की गलत निकासी से खुला मामला, अब पूरे बिहार में जांच की तैयारी

प्रारंभिक जांच में परिवहन भत्ते की गलत निकासी का मामला सामने आने के बाद महालेखाकार कार्यालय ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाने की तैयारी की है। अब विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन भुगतान, भत्तों तथा वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जाएगी।इस प्रक्रिया में एचआरएमएसपोर्टल के डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर संदिग्ध भुगतान और लेन-देन को चिह्नित किया जा रहा है। जांच के दौरान सामने आने वाले संदिग्ध मामलों का विवरण पीएचईडी को भेजकर जवाब मांगा जाएगा। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और भुगतान के आधार की जांच की जाएगी।

चपरासी से अभियंता प्रमुख तक खंगाले जाएंगे वेतन और भत्तों के रिकॉर्ड

जांच की सबसे अहम कड़ी जिलों में स्थित कार्य प्रमंडल होंगे, जहां कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा सकती है। महालेखाकार की विशेष टीमें संबंधित कार्यालयों में जाकर रिकॉर्ड का मिलान करेंगी।जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कहीं किसी कर्मचारी या अधिकारी ने निर्धारित पात्रता से अधिक वेतन अथवा भत्तों की निकासी तो नहीं की। साथ ही, भुगतान की स्वीकृति, सेवा संबंधी रिकॉर्ड और पोर्टल पर दर्ज विवरण का भी मिलान किया जा सकता है।यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित कर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी। नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई, अतिरिक्त भुगतान की वसूली और गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

कैसे-कैसे हो सकती हैं गड़बड़ियां? जांच में तीन बिंदुओं पर नजर

1. परिवहन भत्ते की गलत निकासी: मुख्यालय की शुरुआती जांच में दो अधिकारियों से जुड़े परिवहन भत्ते के भुगतान पर सवाल उठे हैं। अब यह पता लगाना जरूरी होगा कि निकासी किन परिस्थितियों में हुई और क्या भुगतान नियमों के अनुरूप था।

2. मूल वेतन और अन्य भत्तों में अंतर: जांच में यह भी देखा जाएगा कि कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्धारित वेतनमान तथा पात्रता के मुताबिक भुगतान हुआ या नहीं। यदि किसी ने निर्धारित राशि से अधिक भुगतान लिया है, तो उसके कारणों की पड़ताल की जाएगी।

3. HRMS पोर्टल पर संदिग्ध भुगतान: डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से असामान्य लेन-देन और भुगतान संबंधी विसंगतियों की पहचान करने की तैयारी है। हालांकि, किसी भुगतान का संदिग्ध दिखना अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है। अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही निकलेगा।

PHED का पक्ष: लिखित आपत्ति आने पर होगा समाधान

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि महालेखाकार कार्यालय की ओर से लिखित आपत्ति मिलने पर उसका समाधान किया जाएगा। दूसरी ओर, एजी कार्यालय मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्यभर में रिकॉर्ड की जांच की तैयारी कर रहा है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यालय में सामने आई शुरुआती गड़बड़ियां केवल कुछ अधिकारियों तक सीमित हैं या जिलों के कार्यालयों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुई हैं। इसका जवाब विस्तृत ऑडिट के बाद ही मिल सकेगा।फिलहाल जांच के नतीजों का इंतजार है। यदि वेतन और भत्तों की निकासी में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के साथ सरकारी राशि की वसूली भी हो सकती है।

ब्यूरो रिपोर्ट