बिहार पुलिस की पहली समर्पित ड्रोन यूनिट का गठन, आसमान से होगी ट्रैफिक और अपराधियों की निगरानी नियमों को तोड़ना अब पड़ेगा भारी, ऑन-द-स्पॉट चालान
Patna - बिहार पुलिस अपनी कार्यप्रणाली को पूरी तरह आधुनिक बनाने जा रही है। राज्य में पहली बार एक समर्पित 'ड्रोन यूनिट' का गठन किया जा रहा है, जो न केवल भीड़ और सुरक्षा की निगरानी करेगी, बल्कि सड़क पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों का मौके पर ही चालान भी काटेगी।
बिहार में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक बनाने की दिशा में पुलिस मुख्यालय ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में पहली बार एक अलग ड्रोन यूनिट गठित की जा रही है। इस यूनिट का मुख्य उद्देश्य पुलिस की पहुंच उन क्षेत्रों तक बनाना है जहाँ भौतिक रूप से गश्त करना कठिन होता है। तकनीक के इस समावेश से पुलिसिंग अब केवल जमीन तक सीमित न रहकर आसमान से भी प्रभावी होगी।
50 आधुनिक ड्रोन की खरीद और वितरण योजना
एडीजी (आधुनिकीकरण) सुधांशु कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस विशेष यूनिट के लिए कुल 50 ड्रोन खरीदे जाएंगे। इनमें से 40 ड्रोन राज्य के सभी 40 पुलिस जिलों को सौंपे जाएंगे, ताकि जिला स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके। शेष 10 ड्रोन विशेष रूप से स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को दिए जाएंगे, जो विशेष ऑपरेशनों और चुनौतीपूर्ण अभियानों में इनका उपयोग करेंगे।
यातायात प्रबंधन और स्मार्ट चालान प्रणाली
इस नई तकनीक का सबसे बड़ा असर सड़कों पर दिखने वाला है। ड्रोन के माध्यम से अब ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों, जैसे—बिना हेलमेट वाहन चलाना, गलत लेन में ड्राइविंग, और सिग्नल तोड़ने वालों की पहचान ऊंचाई से की जाएगी। ड्रोन कैमरों द्वारा कैप्चर किए गए फुटेज के आधार पर वाहन मालिकों के खिलाफ सीधे चालान की कार्रवाई की जाएगी, जिससे ट्रैफिक जाम और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
भीड़ नियंत्रण और लाइव मॉनिटरिंग की सुविधा
बड़े आयोजनों, त्योहारों और राजनीतिक रैलियों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करना हमेशा से एक चुनौती रही है। ड्रोन यूनिट की मदद से अब संवेदनशील इलाकों की लाइव मॉनिटरिंग संभव होगी। ऊंचाई से मिल रहे फीड के आधार पर पुलिस मुख्यालय तुरंत यह तय कर सकेगा कि किस बिंदु पर अतिरिक्त बल भेजने की आवश्यकता है, जिससे किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सकेगा।
दियारा और दुर्गम क्षेत्रों में अपराधियों की खैर नहीं
बिहार के भौगोलिक रूप से कठिन इलाकों, जैसे 'दियारा' क्षेत्र और पहाड़ी इलाकों में अपराधियों की गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए STF इन ड्रोनों का इस्तेमाल करेगी। इन क्षेत्रों में पुलिस की सीधी पहुंच अक्सर सीमित होती है, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं। अब ड्रोन तकनीक के जरिए अपराधियों के छिपने के ठिकानों और उनकी हरकतों पर पैनी नजर रखी जा सकेगी, जिससे संगठित अपराध पर प्रहार करना आसान होगा।
मार्च 2026 तक पूरी तरह सक्रिय होने का लक्ष्य
पुलिस मुख्यालय इस योजना को तेजी से जमीन पर उतारने की तैयारी में है। एडीजी ने संकेत दिए हैं कि मार्च महीने तक सभी 50 ड्रोन की खरीद और संबंधित कर्मियों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया जाएगा। उम्मीद है कि मार्च के अंत तक बिहार की सड़कों और संवेदनशील क्षेत्रों के आसमान में ये ड्रोन पहरा देते नजर आएंगे, जो राज्य की आधुनिक पुलिसिंग का नया चेहरा होंगे।