बिहार पुलिस की 'हिट जोड़ी': पुलिसिंग में "थॉट और एक्शन" का 'डेडली कॉम्बिनेशन'

डीजीपी विनय कुमार अपने शांत स्वभाव, प्रशासनिक पकड़ और दूरदर्शी योजना के लिए जाने जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ डीजी (अभियान) कुंदन कृष्णन को मैदानी स्तर पर कड़क फैसले लेने,तुरंत एक्शन और आक्रामक फील्ड ऑपरेशन के लिए जाना जाता है

बिहार पुलिस की 'हिट जोड़ी'- फोटो : Reporter

बिहार को पूरी तरह से नक्सल मुक्त बनाने में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिहार पुलिस को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा सम्मान मिला है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित बादल अकादमी में आयोजित “उजर बस्तर” कार्यक्रम में यह गौरवपूर्ण सम्मान प्रदान किया। इस विशेष अवसर पर बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार, बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के अधिकारियों व कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट और साहसिक सेवा के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। 

विनय कुमार और कुंदन कृष्णन की 'हिट जोड़ी' का कमाल

बिहार पुलिस की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे सूबे के दो सबसे काबिल और कड़क आईपीएस अधिकारियों की जुगलबंदी रही है। डीजीपी विनय कुमार और डीजी (अभियान) कुंदन कृष्णन की यह जोड़ी न केवल नक्सलियों के खिलाफ 'हिट' साबित हुई है, बल्कि राज्य में अपराधियों के सफाए में भी इसका कोई सानी नहीं है। इन दोनों शीर्ष अधिकारियों की सटीक रणनीति, बेहतरीन प्रशासनिक पकड़ और मैदानी स्तर पर बेहद सार्थक समन्वय का ही नतीजा है कि आज बिहार पुलिस राष्ट्रीय पटल पर चमक रही है।

सटीक रणनीति और 'टीम वर्क' का तालमेल

जहाँ एक तरफ डीजीपी विनय कुमार अपने शांत स्वभाव, प्रशासनिक पकड़ और दूरदर्शी योजना (Visionary Planning) के लिए जाने जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ डीजी (अभियान) कुंदन कृष्णन को मैदानी स्तर पर कड़क फैसले लेने, तुरंत एक्शन (Swift Execution) और आक्रामक फील्ड ऑपरेशन के लिए महारत हासिल है। इन दोनों का यह तालमेल पुलिसिंग को "थॉट और एक्शन" का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन देता है।


'क्रैक टीम' और एसटीएफ (STF) का सही इस्तेमाल

कुंदन कृष्णन के पास पहले भी बिहार एसटीएफ का लंबा और सफल अनुभव रहा है। इस जोड़ी ने एसटीएफ और एंटी-नक्सल यूनिट्स को आधुनिक हथियार, उन्नत तकनीक और पूरी स्वायत्तता (Freedom to Act) दी। इसी का नतीजा है कि बिहार-झारखंड सीमा के जिन दुर्गम इलाकों में पहले पुलिस जाने से बचती थी, वहां आज सुरक्षा बलों का पूरा नियंत्रण है।


अंतरराज्यीय समन्वय (Interstate Coordination)

नक्सली या बड़े अपराधी अक्सर अपराध करने के बाद पड़ोसी राज्यों (जैसे झारखंड, उत्तर प्रदेश या छत्तीसगढ़) की सीमाओं का फायदा उठाकर भाग जाते थे। इस जोड़ी ने अन्य राज्यों के पुलिस कप्तानों और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ सीधे और मजबूत संबंध स्थापित किए। "उजर बस्तर" कार्यक्रम में जो सम्मान बिहार पुलिस को मिला, वह इसी अंतरराज्यीय तालमेल की सफलता का सबसे बड़ा सबूत है।


सुरक्षा के साथ विकास का 'बिहार मॉडल'

इस जोड़ी की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि इन्होंने केवल गोलियां चलाने पर भरोसा नहीं किया। जिन इलाकों को नक्सलियों के कब्जे से मुक्त कराया गया, वहां तुरंत स्थानीय प्रशासन की मदद से सड़कें, स्कूल और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गईं। इसे ही 'सुरक्षा एवं विकास आधारित पुलिसिंग मॉडल' कहा जाता है, जिसने जनता के मन से खौफ को मिटाकर प्रशासन के प्रति भरोसा जगाया है।

रिपोर्ट - पुष्कर प्रवीण