बिहार पुलिस का ऐतिहासिक सुधार: 425 थानों में अब इंस्पेक्टर होंगे थाना प्रभारी,217 नए थानों को किया गया अपग्रेड

बिहार पुलिस मुख्यालय ने नए आपराधिक कानूनों के तहत राज्य के 425 थानों में इंस्पेक्टर को थानाध्यक्ष नियुक्त करने का आदेश जारी किया है।अंचल निरीक्षक की शक्तियों से लैस इन अधिकारियों के तहत अनुसंधान और विधि-व्यवस्था की अलग इकाइयां काम करेंगी।

बिहार पुलिस का ऐतिहासिक सुधार: 425 थानों में अब इंस्पेक्टर ही होंगे थाना प्रभारी- फोटो : Reporter

बिहार सरकार और पुलिस मुख्यालय ने राज्य की कानून-व्यवस्था, विधि-व्यवस्था और अनुसंधान (जांच) प्रणाली को आधुनिक और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एक ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा 22 जून 2026 को जारी आदेश के तहत, अब राज्य के कुल 425 सामान्य श्रेणी के थानों में पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) स्तर के पदाधिकारियों को थानाध्यक्ष (SHO) के रूप में पदस्थापित किया जाएगा। वर्तमान में चिन्हित 208 थानों के अतिरिक्त, नए आपराधिक कानूनों की आवश्यकताओं को देखते हुए 217 और थानों को इस कोटि में उत्क्रमित (upgrade) किया गया है। इन नए 217 थानों का चयन उनके आकार, अपराध की संवेदनशीलता और वहां प्रतिवर्ष दर्ज होने वाले औसतन कम-से-कम 350 कांडों (केसों) के आधार पर किया गया है।


नए आपराधिक कानूनों (सहिताओं) के क्रियान्वयन को मिलेगी गति

इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल की मुख्य वजह देश में 1 जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—हैं। दस्तावेज़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि इन नए कानूनों का मूल उद्देश्य 'नागरिक केंद्रित पुलिसिंग' को बढ़ावा देना, वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता देना और मामलों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करना है। इंस्पेक्टर स्तर के अनुभवी अधिकारियों के हाथों में कमान सौंपने से गंभीर और संवेदनशील अपराधों की ससमय वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही, जांच की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है।

अनुसंधान और विधि-व्यवस्था इकाइयों का प्रभावी पृथक्कीकरण

इस आदेश के जरिए पुलिस थानों के भीतर आंतरिक अनुशासन और प्रभावी नियंत्रण को एक नया ढांचा दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'प्रकाश सिंह बनाम अन्य' मामले में दिए गए ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों तथा बिहार पुलिस अधिनियम-2007 के आलोक में थानों में 'अनुसंधान इकाई' (Investigating Unit) और 'विधि-व्यवस्था इकाई' (Law & Order Unit) को पहले ही अलग किया जा चुका है। अब नए नियम के तहत, इंस्पेक्टर स्तर के थानाध्यक्ष के अधीन दो अलग-अलग सब-इंस्पेक्टर (SI) रैंक के अधिकारी क्रमशः 'अपर थानाध्यक्ष-अनुसंधान' और 'अपर थानाध्यक्ष-विधि-व्यवस्था' के रूप में कार्य करेंगे। इससे थानाध्यक्ष के लिए थाने के विभिन्न प्रभागों जैसे किशोर अपराध, महिला हेल्प डेस्क और विधि-व्यवस्था पर बेहतर ढंग से पर्यवेक्षण और नियंत्रण रखना आसान हो जाएगा।

वित्तीय बोझ के बिना सुचारू प्रबंधन और अंचल निरीक्षक का प्रभार

इस नीतिगत निर्णय की सबसे व्यावहारिक विशेषता यह है कि 425 थानों में इंस्पेक्टरों की तैनाती से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ या नए पदों के सृजन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी; इसे जिलों के वर्तमान स्वीकृत पदबल से ही समायोजित किया जाएगा। आदेश के अनुसार, इन चिन्हित थानों के थानाध्यक्ष अपने थाने के पदेन 'अंचल निरीक्षक' (Circle Inspector) के रूप में भी कार्य करेंगे, जिससे उनके पास अंचल निरीक्षक की सभी शक्तियां और कार्य निहित रहेंगे, हालांकि उनका क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार केवल उनके अपने थाने तक ही सीमित रहेगा। पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी आपातकालीन या अल्पकालिक अवकाश की स्थिति में इंस्पेक्टर रैंक से नीचे के किसी भी पदाधिकारी (जैसे सब-सिंस्पेक्टर) को इन थानों का नियमित या पूर्णकालिक थाना प्रभारी नहीं बनाया जाएगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है।

रिपोर्ट - पुष्कर प्रवीण