जदयू में बगावत के सुर! आनंद मोहन का तंज- 'जिनकी मुखिया बनने की औकात नहीं, वो बिहार का नसीब लिख रहे'

बिहार में नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबरों के बीच आनंद मोहन ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा कि नीतीश की विदाई से तेजस्वी को फायदा होगा और निशांत कुमार को सीएम बनाने की मांग की।

सीएम नीतीश के इस्तीफे से नाराज हुए आनंद मोहन।- फोटो : धीरज सिंह

New Delhi - : बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा निर्वाचन और संभावित इस्तीफे की खबरों ने भूचाल ला दिया है। इस फैसले पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर ही विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। पूर्व सांसद आनंद मोहन ने नीतीश कुमार की इस 'विदाई' पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे एनडीए के लिए आत्मघाती कदम बताया है। उन्होंने सीधे तौर पर उन नेताओं पर निशाना साधा जो पर्दे के पीछे से बिहार की सत्ता के समीकरण बदल रहे हैं।

"वार्ड पार्षद जीतने की हैसियत नहीं और लिख रहे बिहार का नसीब"

आनंद मोहन ने बिना नाम लिए एनडीए के रणनीतिकारों पर हमला बोलते हुए कहा, "जिन लोगों को वार्ड पार्षद या मुखिया का चुनाव जीतने की हैसियत नहीं है, वे आज बिहार का नसीब लिख रहे हैं।" उन्होंने तर्क दिया कि जब चुनाव में '25 से 30 - फिर से नीतीश' का नारा दिया गया था, तो मात्र तीन महीने बाद उन्हें पद से हटाना जनादेश के साथ खिलवाड़ है। आनंद मोहन के अनुसार, नीतीश की इस तरह विदाई से सीधे तौर पर तेजस्वी यादव और महागठबंधन को बड़ा राजनीतिक फायदा होगा।

"निशांत कुमार बनें मुख्यमंत्री, भाजपा बनाययी तो लव-कुश कार्ड चले"

पार्टी में बढ़ते असंतोष के बीच आनंद मोहन ने एक नया फॉर्मूला पेश किया है। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार की भरपाई करनी है, तो उनके बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है, तो उसे 'लव-कुश' समाज (कुर्मी-कोययरी) या किसी अतिपिछड़ा वर्ग के नेता को आगे करना चाहिए। उन्होंने ललन सिंह को सीएम बनाने की मांग को महागठबंधन की 'अगड़ा बनाम पिछड़ा' की लड़ाई शुरू करने की साजिश करार दिया।

जनता के गुस्से को दबाने की कोशिश

पूर्व सांसद ने दावा किया कि एनडीए के नेता बार-बार यह बयान इसलिए दे रहे हैं कि सरकार नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में चलेगी, ताकि जनता के "अंडे, टमाटर और चप्पल" वाले गुस्से को शांत किया जा सके। उन्होंने मांग की कि नीतीश कुमार अब स्वतंत्र रूप से फैसले लें और पार्टी में किसी को भी 'कार्यकारी अध्यक्ष' न बनाया जाए। आनंद मोहन ने यह भी माना कि निशांत कुमार के जदयू में आने से कार्यकर्ताओं की नाराजगी थोड़ी कम हुई है, लेकिन पूर्ण समाधान नेतृत्व परिवर्तन के सही फैसले में ही है।