Bihar Land Rules: विधवाओं, जवानों और SC-ST को बड़ी राहत, बिहार सरकार ने बदला जमीन रजिस्ट्री और विवाद निपटारे का नियम!
बिहार सरकार ने राजस्व मामलों में FIFO नियम को 30 जून 2026 तक स्थगित किया। अब SC/ST, विधवाओं और सैनिकों के भूमि विवादों का प्राथमिकता के आधार पर होगा निपटारा। जानें पूरी रिपोर्ट।
Patna - बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आम जनमानस को राहत देने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा जारी पत्र (पत्रांक-239/सी) के अनुसार, राज्य में अब भूमि संबंधी विवादों और आवेदनों के निपटारे के लिए पारंपरिक FIFO (First In, First Out) यानी 'पहले आओ, पहले पाओ' के सिद्धांत को आगामी 30 जून 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य समाज के वंचित और विशेष वर्गों के मामलों का त्वरित निष्पादन करना है।
मुख्यमंत्री की 'समृद्धि यात्रा' और 'जन कल्याण संवाद' का असर
यह निर्णय हाल ही में मुख्यमंत्री की 'समृद्धि यात्रा' और उपमुख्यमंत्री के 'जन कल्याण संवाद' के दौरान मिली फीडबैक के बाद लिया गया है। छपरा (सारण) और मुंगेर जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में यह बात सामने आई कि विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई जरूरतमंदों को उचित प्राथमिकता नहीं मिल रही थी। सरकार के 'सात निश्चय' के तहत 'Ease of Living' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अब साप्ताहिक 'सोमवारी सभा' और 'शुक्रवारी दरबार' में आने वाली शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
इन पांच विशिष्ट श्रेणियों को मिलेगा 'प्रायोरिटी' का लाभ
नए आदेश के तहत अब राजस्व प्रशासन को पांच विशेष श्रेणियों के आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया गया है। इसमें शामिल हैं:
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST): संविधान के अनुच्छेद-15 के आलोक में।
विधवा महिलाएं: संविधान के अनुच्छेद-39 के तहत।
सैनिक कल्याण: सेना में कार्यरत या सेवानिवृत्त जवान।
सुरक्षाकर्मी: अन्य राज्यों में कार्यरत सुरक्षा बल।
केंद्रीय कर्मचारी: अन्य राज्यों में पदस्थापित केंद्र सरकार के कर्मी।
फिजिकल अपीयरेंस से छूट: वकील या प्रतिनिधि भी हो सकेंगे उपस्थित
विभाग ने माना है कि सुरक्षाकर्मियों और बाहर कार्यरत कर्मचारियों के लिए हर तारीख पर सशरीर उपस्थित होना कठिन होता है। अतः, अब इन श्रेणियों के लोगों को 'Physical Appearance' से छूट दी जाएगी। उनकी अनुपस्थिति में उनके अधिकृत प्रतिनिधि या वकील के माध्यम से सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें अपने भूमि संबंधी कार्यों के लिए बार-बार लंबी छुट्टी लेकर अंचल कार्यालय या DCLR कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते थे।
संवेदनशील और पारदर्शी राजस्व प्रशासन की ओर कदम
प्रधान सचिव ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन श्रेणियों के लोगों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाए। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राजस्व प्रशासन को अधिक 'संवेदनशील और पारदर्शी' बनाने की आवश्यकता है। इस पहल से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि 'सबका साथ सबका विकास' के मंत्र को धरातल पर उतारने में मदद मिलेगी, जिससे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी न्याय सुलभ होगा।
छपरा और मुंगेर की घटनाओं का दिया हवाला
पत्र में जिक्र किया गया है कि 2 अप्रैल को छपरा और 4 अप्रैल को मुंगेर में जन कल्याण संवाद के दौरान यह पाया गया कि कुछ लोगों को 'उचित प्राथमिकता' नहीं मिल रही थी । इसी का आधार बनाकर पूरे राज्य के लिए FIFO के नियम को ही पलट दिया गया । विभाग का कहना है कि सात निश्चय के 'स्तंभ-7' के तहत लोगों को अंचल कार्यालयों और DCLR कोर्ट के चक्कर काटने से बचाना जरूरी है ।