Bihar News : प्रस्तावित नए विश्वविद्यालय विधेयक के खिलाफ एकजुट हुए बिहार के शिक्षक व कर्मचारी संघ, राज्यव्यापी आंदोलन का किया ऐलान

Bihar News : बिहार सरकार द्वारा लाए जा रहे 'विश्वविद्यालय विधेयक-2026' के विरोध में राज्य के सभी प्रमुख शिक्षक एवं कर्मचारी संघ एकजुट हो गए हैं। इस कड़ी में कर्मचारी महासंघों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।

विधेयक के खिलाफ गुस्सा - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुटाब), बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय सेवा शिक्षक महासंघ (फुस्टाब) तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ एवं बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ की संयुक्त बैठक आज शनिवार को पटना के लोहिया नगर, कंकड़बाग स्थित बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के कार्यालय (डॉ.ए.के.सेन भवन) में संपन्न हुई। इसमें पटना विश्वविद्यालय सहित राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक व कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी भागीदारी निभाई। बैठक की अध्यक्षता फुस्टाब के उपाध्यक्ष सह विधान पार्षद डॉ. वीरेन्द्र नारायण यादव, फुटाब के उपाध्यक्ष प्रो.अशोक कुमार सिंह, दोनों राज्य कर्मचारी महासंघों के नेता द्वय वेंकटेश कुमार एवं राधवेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता फुटाब के महासचिव सह विधान पार्षद प्रो.संजय कुमार सिंह ने बताया कि बिहार सरकार द्वारा बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 तथा पटना विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 को निरस्त कर नया विश्वविद्यालय विधेयक-2026 लाने की तैयारी चल रही है। सरकार के द्वारा नए प्रस्तावित विधेयक को 20 जुलाई से चल रहे मॉनसून सत्र में लाने की पूरी तैयारी थी, लेकिन सभी शिक्षक प्रतिनिधियों तथा शिक्षकों एवं कर्मचारी महासंघों के पदाधिकारियों के संयुक्त प्रयास से उसे तत्काल स्थगित कराने में सफलता मिली है। परन्तु अभी भी यह आशंका बरकरार है कि भविष्य में पुनः सरकार यह विधेयक लाने का प्रयास करे। 

उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित विधेयक से विश्वविद्यालय की स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी और उच्च शिक्षा व विश्वविद्यालयों का उद्देश्य ही नष्ट हो जाएगा। यह प्रस्तावित विधेयक न केवल शिक्षकों एवं कर्मचारियों, वरन् विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा पूरे राज्य के लिए ख़तरनाक है। अतएव हम सभी शिक्षक व कर्मी एक साथ संयुक्त रूप से विरोध कर रहे हैं। इसमें विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारियों, प्रधानाचार्यों, विभागाध्यक्षों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को भी साथ लेकर इसे जनांदोलन का रूप दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उच्च शिक्षा के हितों की रक्षा के लिए हमारा समर्थन और सहभागिता निरंतर जारी रहेगी।

इस अवसर पर विधान पार्षद मदन मोहन झा ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल प्रशासनिक संरचनाएँ नहीं हैं, बल्कि वे स्वायत्त शैक्षणिक संस्थान हैं, जहाँ शिक्षण, अनुसंधान, पाठ्यक्रम निर्माण, परीक्षाएँ, मूल्यांकन नियुक्तियाँ तथा शैक्षणिक मानकों का निर्धारण एक समेकित संस्थागत ढाँचे के अंतर्गत होता है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था विश्वविद्यालयों की अपने ही अंगीभूत महाविद्यालयों पर शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अधिकारिता को काफी हद तक सीमित कर देगी। शिक्षकों के  पदस्थापन, स्थानांतरण, प्रतिनियुक्ति, तैनाती, प्रशासनिक नियंत्रण तथा संस्थागत संचालन से जुड़े निर्णय क्रमशः विश्वविद्यालयों के वैधानिक निकायों के स्थान पर कार्यपालिका के अधीन चले जाने की आशंका है। विधान पार्षद डॉ. वीरेन्द्र नारायण यादव ने कहा कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था भारत में विशिष्ट है और यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। यह देश का एकमात्र राज्य है, जहाँ संबद्ध तथा सरकारी महाविद्यालयों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में अंगीभूत महाविद्यालय भी हैं। इन अंगीभूत महाविद्यालयों में से अनेक शैक्षणिक उपलब्धियों एवं अनुसंधान के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों के समकक्ष हैं। इस अवसर पर सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघों एवं कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। पटना विश्वविद्यालय सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों में चल रहे आन्दोलन की भी समीक्षा की गई।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षक संघ एवं कर्मचारी संघ को सक्रिय किया जाएगा। साथ ही दोनों संघों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। बैठक में विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को बचाने हेतु राज्यव्यापी संघर्षात्मक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई। आगे राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक राज्यस्तरीय संघर्ष समिति का गठन किया गया, जिसमें चारों राज्यस्तरीय संगठनों के दो-दो प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इसमें महामंत्री सह विधान पार्षद प्रो. संजय कुमार सिंह, प्रो. अशोक कुमार सिंह, प्रो. वीरेन्द्र नारायण यादव, डॉ. रामसागर प्रसाद (महासचिव पूटा), प्रो. संतोष कुमार, प्रो. शैलेश कुमार सिंह, ब्रज किशोर सिंह, डॉ. मदन मोहन झा,  गंगा प्रसाद झा, शंकर यादव, राघवेन्द्र कुमार सिंह, वेंकटेश कुमार एवं रोहित कुमार के नाम शामिल हैं। इस राज्यस्तरीय संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक द्वय प्रो. संजय कुमार सिंह एवं गंगा प्रसाद झा बनाए गए हैं। दोनों संयोजकों को आगे के कार्यक्रम की रुपरेखा तय करने हेतु अधिकृत किया गया है। वेंकटेश कुमार को राज्यस्तरीय संघर्ष समिति का मीडिया प्रभारी बनाया गया है। कार्यक्रम की शुरुआत में सभी नेताओं ने संघ के नेता डॉ.ए.के. सेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की। अन्त में धन्यवाद-ज्ञापन ब्रज किशोर सिंह के द्वारा किया गया।

बैठक में प्रो. नवल किशोर शर्मा, प्रो. अनिल कुमार सिंह, प्रो.जयकांत सिंह जय, प्रो. योगेश्वर प्रसाद सिंह, प्रो. शशिभूषण, सुबोध कुमार, नसीम अख्तर, डॉ. सुभाष प्रसाद सिंह, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. हरिश्चंद्र प्रसाद साही, प्रमोद कुमार यादव, विनय कुमार झा, डॉ. जयकांत सिंह (बूस्टा), प्रो. सुनील कुमार सिंह (बूटा), जयकृष्ण राय, सतीश कुमार सिंह, राजीव कुमार, गुंजेश कुमार, रवींद्र कुमार, राजीव रंजन, शशिरंजन, धनंजय कुमार, जयकृष्ण राय, प्रेमचंद, अशोक मिश्र, पवन कुमार मिश्र, कुमार वरुण, ज्योतिष कुमार, डॉ. संगीता कुमारी, डॉ. सुधांशु शेखर आदि उपस्थित थे।