Bihar Salary Scam: बिहार में वेतन और HRA के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी के खुलासे के बाद शिक्षकों -पुलिसकर्मियों के वेतन पर रोक! कहीं 2000 फीसदी तक बढ़ाया भत्ता तो कहीं मृत शिक्षक के नाम पर निकाली राशि

Bihar Salary Scam:बिहार में सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन तथा मकान किराया भत्ता के भुगतान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं।

शिक्षकों -पुलिसकर्मियों के वेतन पर रोक! - फोटो : X

Bihar Salary Scam:बिहार में सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन तथा मकान किराया भत्ता के भुगतान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं। राज्य के करीब एक दर्जन जिलों में फर्जी भुगतान, वेतन में हेराफेरी और सरकारी खजाने से अवैध निकासी के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं निर्धारित दर से कई गुना अधिक HRA का भुगतान किया गया, तो कहीं फर्जी शिक्षक की पहचान बनाकर सरकारी राशि निकाल ली गई। कुछ मामलों में मृत शिक्षक के नाम पर भी वेतन निकासी का खुलासा हुआ है।रिपोर्ट के मुताबिक, केवल तीन जिलों में करीब 3.58 करोड़ रुपये की संदिग्ध या फर्जी निकासी की पुष्टि हुई है। पटना, भागलपुर, सुपौल, औरंगाबाद, बांका, समस्तीपुर, सहरसा, गयाजी और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों से वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि, सभी जिलों में नुकसान की कुल राशि का पूरा ब्योरा अभी उपलब्ध नहीं है।

वेतन भुगतान को लेकर कर्मचारियों में बढ़ी चिंता

घोटाले की जांच के बीच करीब छह लाख शिक्षकों और आठ लाख अन्य कर्मियों के वेतन भुगतान को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वेतन और भत्तों के डेटा का सत्यापन किए जाने से उन कर्मचारियों की चिंता भी बढ़ी है, जिनके भुगतान में कोई गड़बड़ी नहीं है।समय पर वेतन नहीं मिलने से मकान का किराया, बच्चों की स्कूल फीस, इलाज, घरेलू खर्च और बैंक की किस्तें चुकाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में कर्मचारियों की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

दूसरी ओर, शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने दावा किया है कि शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेतन भुगतान रोकने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। विभाग का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने और अनियमितताओं की आशंका दूर करने के लिए वेतन तथा भत्तों के रिकॉर्ड का एहतियाती सत्यापन कराया जा रहा है।

पटना में 76.72 लाख रुपये के HRA भुगतान में गड़बड़ी

पटना के गुलजारबाग स्थित एफएनएस एकेडमी उच्च माध्यमिक विद्यालय में करीब 76.72 लाख रुपये की अवैध वेतन और HRA निकासी का मामला सामने आया है। महालेखाकार की ऑडिट टीम के मुताबिक, नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच कर्मचारियों को निर्धारित 20 प्रतिशत की जगह 200 प्रतिशत या उससे अधिक की दर से भुगतान किया गया।

इस मामले में स्कूल के क्लर्क विजय कृष्ण विद्यार्थी और परिचारी संजू कुमारी को निलंबित किया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के क्लर्क मनीष कुमार और तत्कालीन लिपिक अमित कुमार के खिलाफ 12 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज कराई गई।रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त भुगतान की 76,71,983 रुपये की राशि नौ चेक के माध्यम से सरकारी कोष में वापस जमा कराई गई है। अब ब्याज की वसूली और विभागीय जांच की प्रक्रिया भी चल रही है।

भागलपुर में फर्जी शिक्षिका बनाकर निकाले रुपये

भागलपुर में करीब 98.12 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग के संविदा कर्मी अविनाश राज ने तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी की अटैच लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर तनुश्री नाम की एक काल्पनिक शिक्षिका की प्रोफाइल बनाई। इसे अप्रैल 2025 की पिछली तारीख से सिस्टम में दर्ज किया गया।इस फर्जी प्रोफाइल के आधार पर हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक बैंक खाते में 6.74 लाख रुपये भेजे गए। इसके अलावा, मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 52 लाख रुपये के भुगतान और जुलाई-अगस्त में संदिग्ध लेनदेन की कोशिश की बात सामने आई है। मामले में वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल लॉगिन के इस्तेमाल की जांच अहम मानी जा रही है।

सुपौल में 1.83 करोड़ की निकासी, मृत शिक्षक के नाम पर भी भुगतान

सुपौल जिले में करीब 1.83 करोड़ रुपये के अवैध वेतन भुगतान का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक क्लर्क ने पहले भुगतान हो चुके वेतन और बकाया के नाम पर दोबारा फर्जी बिल तैयार किए। इसके लिए नई पे-आईडी बनाई गई और शिक्षकों के नाम पर फर्जी खाते जोड़े गए।जांच से जुड़े विवरण के अनुसार, सरकारी राशि क्लर्क की मां, सास और बहन के खातों में भी स्थानांतरित की गई। एक मृत सेवानिवृत्त शिक्षक के नाम पर दोबारा वेतन भुगतान कर निकासी करने का आरोप भी सामने आया है। इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह से स्थापना शाखा का प्रभार वापस लिया गया है और उनसे 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

सहरसा में दस साल से स्कूल नहीं जाने पर भी मिलता रहा वेतन

सहरसा जिले के सौर बाजार प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय कांप गोठ उत्तर बाड़ी टोला में एक महिला शिक्षिका के खिलाफ भी गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि वह करीब दस साल तक स्कूल नहीं गईं, लेकिन उनकी हाजिरी दर्ज होती रही और वेतन का भुगतान जारी रहा। बताया गया कि इस दौरान वह दिल्ली में रह रही थीं।शिक्षा विभाग को गुप्त शिकायत मिलने के बाद विशेष टीम ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया। दस्तावेजों और उपस्थिति रजिस्टर की जांच के बाद कथित गड़बड़ी सामने आई। अब शिक्षिका की सेवा समाप्ति और अवैध भुगतान की वसूली की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।

औरंगाबाद, गया और मुजफ्फरपुर में भी जांच

औरंगाबाद के सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात क्लर्क कृष्ण प्रसाद वर्मा पर दो अलग-अलग सरकारी संस्थानों से एक ही अवधि में वेतन लेने का आरोप है। जिला प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया है। इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। जांच समिति ने सेवा पुस्तिका, सेवा अभिलेख और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड से प्राप्त दस्तावेजों समेत अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल की।वहीं, गया और मुजफ्फरपुर में पुलिस विभाग के वेतन और भत्तों में हेराफेरी के आरोप सामने आए हैं। प्रारंभिक विवरण के अनुसार, कुछ कर्मियों का मूल वेतन और HRA उनकी वास्तविक पात्रता से दो से तीन गुना तक बढ़ाकर दर्ज किया गया, जिसके आधार पर अधिक भुगतान हुआ।

HRMS और CFMS डेटा का होगा सत्यापन

बिहार में सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन तथा HRA का भुगतान डिजिटल सिस्टम के तहत HRMS और CFMS पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। आरोप है कि कुछ मामलों में ऑपरेटर लॉगिन या सिस्टम के डेटा में हेरफेर करके निर्धारित दरों से कई गुना अधिक भत्ते दर्ज किए गए। कुछ रिपोर्टों में 200 प्रतिशत से लेकर 2,000 प्रतिशत तक की दरें दर्ज किए जाने का दावा किया गया है।अनियमितताओं के खुलासे के बाद वेतन भुगतान से पहले HRMS डेटा का सत्यापन अनिवार्य किए जाने की जानकारी सामने आई है। सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को 22 अक्टूबर 2026 तक शत-प्रतिशत डेटा सत्यापन पूरा करने का निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और जिन शिक्षकों-कर्मचारियों का रिकॉर्ड सही है, उन्हें समय पर वेतन कैसे मिलता है। सरकार के सामने एक तरफ सरकारी खजाने की सुरक्षा और गड़बड़ियों पर लगाम लगाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ लाखों कर्मचारियों को बिना अनावश्यक देरी के उनका जायज वेतन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी है।