Bihar Toll Tax: जेब पर नया बोझ, सफर भी महंगा... बिहार में स्टेट हाईवे और पुलों पर फिर लगेगा टोल टैक्स, हर किलोमीटर पर देना होगा शुल्क, सड़क से लेकर मकान तक बढ़ेगा खर्च

Bihar Toll Tax: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने राज्य के स्टेट हाईवे और प्रमुख पुलों पर दोबारा टोल टैक्स लगाने का बड़ा फैसला किया है।...

जेब पर नया बोझ, सफर भी महंगा...- फोटो : social Media

Bihar Toll Tax: बिहार में सियासत के साथ अब आम लोगों की जेब पर भी नया वार होने जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने राज्य के स्टेट हाईवे और प्रमुख पुलों पर दोबारा टोल टैक्स लगाने का बड़ा फैसला किया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब राज्य की सड़कों पर सफर करने वाले लाखों लोगों को हर किलोमीटर की कीमत चुकानी पड़ेगी। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे जनता पर 'टैक्स का नया हमला' बता रहा है, जबकि सरकार इसे सड़क रखरखाव और विकास के लिए जरूरी कदम करार दे रही है।दरअसल, वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के सभी स्टेट हाईवे और सरकारी पुलों से टोल टैक्स खत्म कर दिया था। उस समय 54 सड़कों और 116 पुलों पर लगने वाला शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया था। लेकिन अब सत्ता की तस्वीर बदल चुकी है और नई सरकार ने 'बिहार सड़क उपयोगकर्ता शुल्क-2026' नीति लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत लंबी और छोटी दूरी के लगभग सभी स्टेट हाईवे तथा महत्वपूर्ण पुलों पर फिर से टोल वसूला जाएगा। केवल ग्रामीण सड़कों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।

नई नीति के मुताबिक कार, जीप और वैन जैसे हल्के वाहनों से 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर टोल लिया जाएगा। यानी यदि कोई व्यक्ति 100 किलोमीटर स्टेट हाईवे पर सफर करता है तो उसे 125 रुपये टोल देना होगा। वहीं छोटे व्यावसायिक वाहनों से 2 रुपये प्रति किलोमीटर, दो एक्सल वाले बस और ट्रक से 4.25 रुपये प्रति किलोमीटर तथा भारी निर्माण वाहनों और सात एक्सल वाले ट्रकों से 6.65 रुपये से 8.10 रुपये प्रति किलोमीटर तक शुल्क वसूला जाएगा। पूरी प्रक्रिया फास्टैग और डिजिटल पेमेंट के जरिए होगी तथा महंगाई और सड़क की गुणवत्ता के आधार पर हर साल दरों में संशोधन का भी प्रावधान रखा गया है।

सरकार का दावा है कि इस नई नीति से हर साल 500 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी होगी। वहीं व्यापक स्तर पर अनुमान लगाया जा रहा है कि चुनावी वादों—जैसे मुफ्त बिजली, पेंशन योजनाएं, जीविका दीदियों को आर्थिक सहायता और अन्य लोककल्याणकारी घोषणाओं को पूरा करने के लिए सरकार को अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। ऐसे में टोल वसूली को राजस्व बढ़ाने की बड़ी रणनीति माना जा रहा है।उधर, जनता की चिंता सिर्फ टोल तक सीमित नहीं है। पहले ही बालू की बढ़ी कीमत और जमीन के सर्किल रेट में इजाफे ने मकान बनाना महंगा कर दिया है। अब सड़क पर सफर भी महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और आम यात्रियों के बीच इस फैसले को लेकर बेचैनी साफ दिखाई दे रही है।

अब निगाहें सरकार की अगली अधिसूचना पर टिकी हैं। बताया गया है कि अधिसूचना जारी होने के तीन महीने के भीतर टोल वसूली के लिए एजेंसियों का चयन कर लिया जाएगा। इसके बाद बिहार के स्टेट हाईवे पर सफर करने वालों को हर किलोमीटर का हिसाब चुकाना होगा। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या यह फैसला सड़क विकास की नई राह खोलेगा, या फिर जनता की जेब पर बढ़ता बोझ आने वाले दिनों में सियासी मुद्दा बन जाएगा।