बिहार के अधिकारी हो जाएं सतर्क,अब AI पकड़ेगा सरकारी प्रोजेक्ट की सुस्ती, गलती की तो नपा जाएंगे

Bihar AI: बिहार में सरकारी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार अब सिर्फ फाइलों और अफसरों की रिपोर्ट से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की नजर से भी तय होगी।

Bihar AI: बिहार में सरकारी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार अब सिर्फ फाइलों और अफसरों की रिपोर्ट से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की नजर से भी तय होगी। सरकारी परियोजनाओं में होने वाली देरी और लगातार बढ़ती लागत पर शिकंजा कसने के लिए राज्य सरकार ने AI तकनीक को निगरानी और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का हिस्सा बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।राज्य को AI के क्षेत्र में अग्रणी बनाने और मजबूत AI इकोसिस्टम विकसित करने के उद्देश्य से सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, बिहार और टायो एआई इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के बीच करार को राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। इस समझौते के जरिए सरकार को सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की पहचान, प्राथमिकता तय करने, निगरानी और क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग मिलेगा।

इस पूरी व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा AI डैशबोर्ड होगा। यह डैशबोर्ड सरकारी परियोजनाओं की प्रगति पर लगातार नजर रखेगा और किसी प्रोजेक्ट के निर्धारित समय से पीछे जाने या अनुमानित लागत से ज्यादा खर्च होने के शुरुआती संकेत देगा। यानी प्रोजेक्ट में गड़बड़ी या देरी बड़ी समस्या बनने से पहले ही सरकार को अलर्ट मिल सकेगा।सरकार की योजना का सीधा मकसद सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करना और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाना है। समय पर चेतावनी मिलने से विभाग संबंधित एजेंसी या ठेकेदार से जवाब मांग सकेंगे और परियोजना को पटरी पर लाने के लिए समय रहते कदम उठाए जा सकेंगे। इससे जवाबदेही तय करने और परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।करार के तहत सिर्फ प्रोजेक्ट की निगरानी ही नहीं होगी, बल्कि जियोस्पेशियल डेटा मैपिंग, डेमोग्राफिक डेटा और दूसरे महत्वपूर्ण डेटासेट्स का AI आधारित विश्लेषण भी किया जाएगा। इसका इस्तेमाल सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर की प्लानिंग से लेकर निर्माण और रियल-टाइम मॉनिटरिंग तक किया जाएगा।

AI आधारित मैपिंग के जरिए सरकार यह भी समझ सकेगी कि किस इलाके में किस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर की तत्काल जरूरत है। मसलन, किसी क्षेत्र में आबादी तेजी से बढ़ रही है तो वहां सड़क, अस्पताल, स्कूल या अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की जरूरत का आकलन पहले ही किया जा सकेगा। इससे विकास योजनाओं को जरूरत के मुताबिक प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी।इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू मानव संसाधन विकास है। सरकारी अधिकारियों को डिजिटल गवर्नेंस का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे AI आधारित सिस्टम और डेटा एनालिटिक्स का बेहतर इस्तेमाल कर सकें। साथ ही छात्रों, युवाओं और महिलाओं के लिए AI तथा डेटा एनालिटिक्स से जुड़े कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

यानी बिहार सरकार की यह पहल सिर्फ सरकारी प्रोजेक्ट की निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी। इसका लक्ष्य प्रशासनिक व्यवस्था को डेटा आधारित बनाना, योजनाओं में देरी और लागत वृद्धि पर शुरुआती स्तर पर लगाम लगाना और राज्य में AI से जुड़े रोजगार व कौशल का नया इकोसिस्टम तैयार करना है।अगर यह सिस्टम प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू होता है तो लंबे समय से सरकारी परियोजनाओं को परेशान करने वाली देरी, लागत वृद्धि और कमजोर मॉनिटरिंग की समस्या पर तकनीक के जरिए बड़ा प्रहार किया जा सकता है।