Bikram Jamabandi News: 15 महीनों से लॉक पड़ी है जमाबंदी, अंचल कर्मियों और दलालों पर अवैध वसूली का आरोप
रैयती जमीन के डिजिटलीकरण के दौरान कर्मचारियों की चूक से खाता-खेसरा में गलत अंक दर्ज होगए।नतीजा पिछले 15 महीनों से किसानों की जमाबंदी लॉक है और वे अंचल कार्यालय के चक्कर काटने को विवश हैं।Farmer ID न बनने से KCC, खाद अनुदान और किसान सम्मान निधि अटके
बिहार के बिक्रम अंचल में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा रैयती जमीनों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों की घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज करते समय खाता-खेसरा संख्या में गलत अंक दर्ज कर दिए गए। इसके परिणामस्वरूप बिक्रम नगर पंचायत और क्षेत्र की 16 पंचायतों के करीब पांच हजार किसानों की दशकों पुरानी जमाबंदी पिछले 15 महीनों से लॉक पड़ी है।
जमाबंदी लॉक हो जाने के कारण क्षेत्र के किसानों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की 'फार्मर आईडी' नहीं बन पा रही है, जिससे वे किसान सम्मान निधि, केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) और सरकारी अनुदानित खाद जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लाभ से वंचित हो गए हैं। इसके अलावा, जमीन की ऑनलाइन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया भी पूरी तरह से ठप हो गई है।
राजस्व विभाग द्वारा वर्ष 2018-19 में रैयती भूमि का डिजिटलाइजेशन कराया गया था। पिछले वर्ष विभागीय आदेश आया था कि जिन जमाबंदियों में गैरमजरूआ आम, गैरमजरूआ खास या सरकारी भूमि का खाता-खेसरा दर्ज हो गया है, उन्हें लॉक कर दिया जाए। बिक्रम अंचल में डिजिटलाइजेशन के समय अंचल कर्मियों की भूल से कई निजी रैयतों की जमाबंदी में गलत खाता-खेसरा दर्ज कर उन्हें सरकारी या गैरमजरूआ भूमि दर्शा दिया गया, जिसके कारण उनकी निजी जमाबंदी भी लॉक हो गई।
अपनी ही जमीन का रिकॉर्ड सही कराने और जमाबंदी अनलॉक कराने के लिए किसान हर दिन अंचल कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। औसतन प्रतिदिन 50 से अधिक किसान अंचल दफ्तर पहुंच रहे हैं। हालांकि जांच के बाद अब तक लगभग छह हजार जमाबंदी को अनलॉक किया जा चुका है, लेकिन जून 2025 के बाद से लॉक जमाबंदी के मामलों के निष्पादन की गति पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।
पीड़ित किसानों ने अंचल अधिकारियों और कर्मचारियों पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि दफ्तरों में उनकी सुनवाई नहीं हो रही है और कुछ अंचल कर्मी तथा बिचौलिए जमाबंदी अनलॉक करने के नाम पर अवैध वसूली और दलाली का खेल चला रहे हैं। सरकारी गलती का खामियाजा आम किसानों को अपनी जेब ढीली करके और प्रशासनिक चक्कर लगाकर भुगतना पड़ रहा है।
दूसरी ओर, मामले की गंभीरता पर बिक्रम के अंचलाधिकारी मयंक शेखर का कहना है कि किसानों से प्राप्त आवेदनों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि डिजिटलाइजेशन के दौरान भूलवश गलत खाता-खेसरा दर्ज हुआ था, जिसे सुधारकर जमाबंदी को अनलॉक करने की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, निष्पादन में हो रही देरी से किसानों का असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
बिक्रम से ऋषिकेश की रिपोर्ट