बिहार में हो रहा अरबों का काला धंधा! पुलिस,परिवहन,सेल टैक्स और माइनिंग के अफसर हो रहे मालामाल...सुशासन के मुंह पर करारा तमाचा...

च झारखंड से बिहार और उत्तर प्रदेश तक इन दिनों अवैध कोयले का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। फर्जी ई-वे चालान के सहारे प्रतिदिन करीब 100 ट्रक कोयला झारखंड से बिहार और यूपी पहुंचाया जा रहा है।

बिहार में हो रहा अरबों का काला धंधा!- फोटो : news 4 nation

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका इजरायल और ईरान में जारी युद्ध के बीच झारखंड से बिहार और उत्तर प्रदेश तक इन दिनों अवैध कोयले का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। फर्जी ई-वे चालान के सहारे प्रतिदिन करीब 100 ट्रक कोयला झारखंड से बिहार और यूपी पहुंचाया जा रहा है। इस पूरे खेल में एक संगठित सिंडिकेट के सक्रिय होने और कई विभागों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।जानकारी के अनुसार, झारखंड के धनबाद क्षेत्र से चोरी किया गया कोयला गिरिडीह होते हुए कोडरमा के सतगावां मार्ग से बिहार में प्रवेश करता है। इसके बाद यह ट्रक अलग-अलग जिलों से गुजरते हुए यूपी तक पहुंचते हैं। इस रूट को इस तरह तैयार किया गया है कि कम से कम थानों से गुजरना पड़े और जांच की संभावना भी कम रहे।

ऐसे चलता है अवैध कोयले का नेटवर्क

कोयला तस्करों ने एक पूरा तंत्र विकसित कर लिया है। ट्रकों को पास कराने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। यदि रास्ते में कहीं पुलिस रोकती है, तो ड्राइवर “ठाकुर साहब”, “नवाब साहब”, अल्लाह रखा, पाठक जी, शुक्ला जी, सिंह जी, सिंहा जी  जैसे कोड नाम लेते हैं, जिसके बाद बिना ज्यादा जांच के ट्रकों को आगे बढ़ने दिया जाता है।इतना ही नहीं, पूरे रूट पर रेकी की जाती है। जैसे ही कहीं जांच अभियान शुरू होता है, सभी ट्रकों को पहले ही सूचना दे दी जाती है और उन्हें रास्ते में रोक दिया जाता है। जांच खत्म होते ही दोबारा लोकेशन देकर ट्रकों को रवाना किया जाता है।

इन रास्तों से गुजरते हैं ट्रक

झारखंड से निकलने के बाद ट्रक बिहार के कई थानों से गुजरते हैं, जिनमें सतगावां, गोविंदपुर, नवादा नगर, नवादा मुफस्सिल, वारिसलीगंज, रोह, हिसुआ, नारदीगंज और कादिरगंज शामिल हैं। इसके बाद नालंदा और शेखपुरा सीमा से होते हुए कतरीसराय, गिरियक और बिहारशरीफ (NH-31) पहुंचते हैं। फिर पटना जिले के बख्तियारपुर, दनियावां, खुसरूपुर, फतुहा, मालसलामी और जक्कनपुर से गुजरते हुए यह ट्रक यूपी की ओर निकल जाते हैं।

जांच की भनक मिलते ही रुक जाते हैं ट्रक

हाल ही में नवादा में चल रहे जांच अभियान के दौरान इसका बड़ा उदाहरण सामने आया। जैसे ही झारखंड से आ रहे ट्रकों को जांच की सूचना मिली, करीब 40 ट्रकों को सतगावां थाना क्षेत्र में ही रोक दिया गया। जांच खत्म होने के बाद ही उन्हें बिहार में प्रवेश कराया गया।इस अवैध कारोबार से झारखंड सरकार को हर दिन करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। इतने बड़े स्तर पर कोयले की तस्करी होना कई सवाल खड़े करता है। बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इस तरह का नेटवर्क चलना संभव नहीं माना जा रहा है।

 सवाल: कौन है इस सिंडिकेट के पीछे?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस सिंडिकेट को संरक्षण कौन दे रहा है। जिस तरह से ट्रकों को लोकेशन, कोड और सुरक्षा मिल रही है, उससे साफ है कि इसमें कई स्तरों पर सेटिंग का खेल चल रहा है।अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा।