बिहार विधानसभा में बीजेपी विधायकों में हुई नोकझोंक, अशोक चौधरी को लगा बड़ा झटका
कचरा निष्पादन को लेकर उठे एक सवाल पर सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी के विधायक आपस में ही उलझते नजर आए।
Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान गुरुवार को कचरा निष्पादन को लेकर उठे एक सवाल पर सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी के विधायक आपस में ही उलझते नजर आए। मधुबन के विधायक राणा रणधीर की अनुपस्थिति में मोतिहारी के विधायक प्रमोद कुमार ने यह प्रश्न सदन में रखा। इस पर भाजपा के कई विधायक आपस में उलझ गए।
दरअसल, प्रमोद कुमार के सवाल के जवाब में नगर विकास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभिन्न शहरों में कचरा निष्पादन की स्थिति का विस्तार से ब्यौरा दिया। इसके बाद प्रमोद कुमार ने यह जानना चाहा कि क्या सरकार कचरे से ऊर्जा उत्पादन की दिशा में भी काम कर रही है। मंत्री विजय सिन्हा ने भरोसा दिलाया कि वे व्यक्तिगत रूप से बैठकर पूरी योजना की जानकारी देंगे और सरकार इस विषय की नियमित समीक्षा कर रही है।
इसी बीच बिहारशरीफ के विधायक सुनील कुमार ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए हस्तक्षेप किया। वहीं, पूर्व मंत्री और विधायक जीवेश मिश्रा ने नगर विकास विभाग की ओर से कचरा निष्पादन से बनने वाली ऊर्जा से जुड़ी जानकारी रखी। इस पर सुनील कुमार ने तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या वे ‘प्रॉक्सी मंत्री’ की भूमिका निभा रहे हैं। विधायकों के बीच बढ़ते तकरार के बाद विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप से स्थिति संभली और कार्यवाही आगे बढ़ी।
अशोक चौधरी को झटका
बिहार विधानमंडल का आज 13 वां दिन है। 13वें दिन सदन की कार्यवाही शुरु होते ही विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। विपक्ष ने सदन में सरकार और विधानसभा स्पीकर पर गंभीर आरोप लगाया है। इस बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राजद विधायक सर्वजीत ने सदन में यह मुद्दा उठाया कि मंत्री अशोक चौधरी द्वारा कथित तौर पर यह कहा गया कि जिन माननीय सदस्यों ने कटौती प्रस्ताव लाया है, उनके क्षेत्र में विकास कार्य नहीं होगा। इस बयान को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया।
राजद विधायक का आरोप
राजद विधायक सर्वजीत ने नियमावली का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी क्षेत्र को राजनीतिक कारणों से विकास कार्यों से वंचित किया जाता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 में निहित समानता और कल्याणकारी राज्य के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र या जनता को दंडित करने की नीयत से विकास कार्य रोकना मनमाना राज्य व्यवहार माना जाएगा।
अध्यक्ष ने स्वीकारा
यह भी कहा कि सदन के भीतर कही गई बातों को लेकर जनप्रतिनिधियों को संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 के तहत विशेषाधिकार प्राप्त है, लेकिन इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। यदि किसी मंत्री द्वारा अनुचित भाषा का प्रयोग किया गया है तो उस पर सदन को संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि, मंत्री ने सदन में इस बात को कहा और वो प्रोसीडिंग में आया जो कि नियम का उल्लंघन है। इस पर स्पीकर ने माना कि अशोक चौधरी का विवादित बयान प्रोसीडिंग में आया है जिसे हटा लिया जाएगा।
रंजन की रिपोर्ट