बांकीपुर की जंग में PK के अभियान को टक्कर देने के लिए भाजपा का चक्रव्यूह, प्रत्याशी बदलने की किरकिरी के बाद नितिन नवीन ने संभाली कमान, जाति का गणित और बूथ की ताकत को देखते हुए बिछाया ये जाल
Bankipur Assembly Election: पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। प्रत्याशी बदलने के फैसले से हुई फजीहत के बाद भाजपा ने अब इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है।...
Bankipur Assembly Election: पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। प्रत्याशी बदलने के फैसले से हुई फजीहत के बाद भाजपा ने अब इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। पार्टी ने जीत की इबारत लिखने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। चुनावी मैदान में संगठन की कमान खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन संभाल रहे हैं और उन्होंने जीत के लिए माइक्रो मैनेजमेंट रणनीति तैयार की है। बांकीपुर सीट पर भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर की सक्रियता मानी जा रही है। प्रशांत किशोर लगातार शहरी, शिक्षित और जागरूक मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने में जुटे हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक जनसंपर्क अभियान चलाकर वह मतदाताओं से सीधा संवाद कर रहे हैं। यही वजह है कि भाजपा ने चुनावी मुकाबले को हल्के में लेने के बजाय संगठन की पूरी मशीनरी मैदान में उतार दी है।
भाजपा की रणनीति का सबसे बड़ा हथियार बूथ मैनेजमेंट है। पार्टी का साफ मानना है कि चुनाव बड़े-बड़े मंचों और रैलियों से नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर मतदाताओं से मजबूत रिश्ते बनाकर जीता जाता है। इसी फॉर्मूले के तहत बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को करीब 60 से 65 चुनावी क्लस्टरों में बांटा गया है और हर शक्ति केंद्र के जरिए बूथों की निगरानी की जा रही है।
पार्टी ने क्षेत्र में 60 शक्ति केंद्र बनाए हैं, जबकि करीब 50 विधायक और विधान परिषद सदस्यों को चुनावी मोर्चे पर उतारा गया है। हर मोहल्ले की सामाजिक और जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए नेताओं की जिम्मेदारी तय की गई है। जिस इलाके में जिस समुदाय का प्रभाव अधिक है, वहां उसी समाज के प्रभावशाली नेताओं को जनसंपर्क के लिए भेजा जा रहा है।
भाजपा ने बांकीपुर को 10 मंडलों में विभाजित कर हर मंडल स्तर पर चुनाव कार्यालय बनाया है। यहां से शक्ति केंद्रों और बूथों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। बूथ अध्यक्षों के साथ बीएलए-2 की तैनाती की गई है, जो मतदाता सूची, नए वोटरों, स्थानीय नाराजगी और चुनावी माहौल की जानकारी संगठन तक पहुंचा रहे हैं।पार्टी ने मतदाताओं को भी अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर रणनीति बनाई है। इनमें भाजपा के पक्के समर्थक, पार्टी से बाहर लेकिन समर्थक मतदाता, तटस्थ वोटर और विरोधी मतदाता शामिल हैं। तटस्थ मतदाताओं को साधने के लिए घर-घर संपर्क अभियान पर जोर दिया जा रहा है।
वकील, व्यापारी, शिक्षक, छात्र, महिला और नौकरीपेशा वर्ग के मतदाताओं के लिए अलग-अलग संपर्क अभियान चलाए जा रहे हैं। भाजपा नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे रोजाना जनसंपर्क करें, स्थानीय प्रभावशाली लोगों से मुलाकात करें और संगठन की गतिविधियों की रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाएं।
दूसरी ओर, राजद प्रत्याशी रेखा कुमारी भी चुनावी मैदान में सक्रिय हैं, लेकिन तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति के कारण फिलहाल प्रचार अभियान की रफ्तार सीमित नजर आ रही है। उनके लौटने के बाद चुनावी मुकाबले के और तेज होने की संभावना है।
बांकीपुर सीट पर भाजपा की सबसे बड़ी चिंता कम मतदान प्रतिशत भी है। इसलिए पार्टी का पूरा जोर अपने समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने पर है। अब देखने वाली बात होगी कि भाजपा का यह बूथ आधारित सियासी चक्रव्यूह कितना कारगर साबित होता है और प्रशांत किशोर की चुनौती के सामने पार्टी अपनी पुरानी पकड़ कायम रख पाती है या नहीं।