बांकीपुर जीतने के लिए BJP-PK ने झोंकी पूरी ताकत, नितिन नवीन की रणनीति बनाम प्रशांत किशोर का घर-घर अभियान, बूथ से लेकर नैरेटिव तक छिड़ी आर-पार की जंग
Bankipur Bypoll: बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शुमार बांकीपुर इन दिनों महज़ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि सियासी ताकत, संगठन और जनाधार की असली परीक्षा बन गया है। ...
Bankipur Bypoll: बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शुमार बांकीपुर इन दिनों महज़ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि सियासी ताकत, संगठन और जनाधार की असली परीक्षा बन गया है। एक ओर भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन की अगुवाई में बूथ आधारित माइक्रो-मैनेजमेंट का ऐसा मजबूत चुनावी किला खड़ा किया है, तो दूसरी ओर जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर उसी किले में घर-घर दस्तक देकर सेंध लगाने की कोशिश में जुटे हैं। दोनों दलों ने अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है और अब मुकाबला संगठन बनाम जनसंपर्क, बूथ बनाम नैरेटिव और जातीय समीकरण बनाम जनभावना का दिखाई दे रहा है।
भाजपा ने बांकीपुर में चुनाव जीतने के लिए चार-लेयर वाली रणनीति लागू की है। पूरे क्षेत्र को 60 से अधिक शक्ति केंद्रों, 10 मंडलों और सभी बूथों में विभाजित कर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय की गई है। पार्टी का मूल मंत्र है-"बूथ जीतो, चुनाव जीतो।" इसी सोच के तहत 50 से अधिक विधायक और विधान परिषद सदस्य लगातार पॉकेट मीटिंग कर रहे हैं। मोहल्लों की सामाजिक और जातीय बनावट का विश्लेषण कर उसी समाज के प्रभावशाली नेताओं को प्रचार में उतारा गया है, ताकि मतदाताओं तक सीधा संदेश पहुंचाया जा सके।
इसके बरअक्स प्रशांत किशोर ने भी चुनावी बिसात पर अपनी अलग चाल चली है। जन सुराज ने सभी 422 बूथों पर महिला कार्यकर्ताओं, बूथ प्रभारी और युवा टीमों के साथ तीन-लेयर का संगठन तैयार किया है। खुद प्रशांत किशोर लगातार पदयात्रा कर रहे हैं। अब तक करीब 20 पदयात्राएं और दो दर्जन से अधिक मोहल्ला बैठकों के जरिए वे हजारों लोगों से सीधे संवाद कर चुके हैं। पार्टी का दावा है कि माइक्रो मीटिंग के माध्यम से प्रतिदिन लगभग पांच हजार मतदाताओं तक पहुंच बनाई जा रही है।
चुनावी फिजा में सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा नीट पेपर लीक को बनाया जा रहा है। प्रशांत किशोर लगातार आरोप लगा रहे हैं कि वर्षों से बिहार के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहा है। उनका कहना है कि मेहनत करने वाले युवाओं को रोजगार नहीं मिलता, जबकि पेपर लीक और भर्ती घोटालों से व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। चुनावी सभाओं और मोहल्ला बैठकों में वे इसी मुद्दे को सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए भाजपा को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
जन सुराज की रणनीति केवल मुद्दों तक सीमित नहीं है। वार्ड पार्षद का चुनाव हार चुके स्थानीय नेताओं को संगठन से जोड़कर पार्टी जमीनी नेटवर्क मजबूत कर रही है। इसके साथ ही करीब 20 स्टार प्रचारकों की टीम घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रही है। सोशल मीडिया पर भी जन सुराज पूरी ताकत झोंक रही है। सात से आठ सदस्यों की डिजिटल टीम प्रशांत किशोर की हर गतिविधि को वीडियो और पोस्ट के जरिए लोगों तक पहुंचा रही है। पार्टी प्रतिदिन 10 से 11 वीडियो साझा कर चुनावी माहौल बनाने में जुटी है।
उधर भाजपा अपने मजबूत संगठन, कार्यकर्ता नेटवर्क और परंपरागत वोट बैंक पर भरोसा जता रही है। पार्टी का मानना है कि बांकीपुर उसका मजबूत गढ़ है और बूथ स्तर पर की गई तैयारी उसे बढ़त दिलाएगी। वहीं प्रशांत किशोर इस चुनाव को केवल एक विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति की नई दिशा तय करने वाली लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं। उनका दावा है कि बांकीपुर का जनादेश यह संदेश देगा कि शहरी मतदाता और युवा वर्ग मौजूदा सरकार के कामकाज को किस नजर से देख रहे हैं।
अब निगाहें मतदान और नतीजों पर टिकी हैं। एक तरफ भाजपा की संगठित चुनावी मशीनरी है, तो दूसरी ओर प्रशांत किशोर का आक्रामक जनसंपर्क अभियान। बांकीपुर की यह जंग तय करेगी कि चुनावी मैदान में बूथ प्रबंधन भारी पड़ता है या जनभावनाओं पर आधारित नया राजनीतिक नैरेटिव।
हीरेश कुमार की रिपोर्ट