सम्राट मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय गणित सेट, सबसे ज्यादा EBC-OBC पर मेहरबानी, भूमिहार-राजपूत से 6 मंत्री, 7 दलित
मंत्रिमंडल में EBC वर्ग से सर्वाधिक मंत्री बनाए गए हैं। वहीं दलित और ओबीसी समुदाय से 7-7 नेताओं को जगह मिली है। सवर्ण वर्ग से 8 मंत्री बनाए गए हैं।
Bihar cabinet expansion : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का गुरुवार को विस्तार किया गया, जिसमें जातीय और सामाजिक समीकरणों का खास ध्यान रखा गया। 34 सदस्यों वाले बिहार मंत्रिमंडल में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को मिला है। इसके अलावा दलित, ओबीसी, सवर्ण और अल्पसंख्यक समुदायों को भी संतुलित भागीदारी देने की कोशिश की गई है। मंत्रिमंडल में EBC वर्ग से सर्वाधिक मंत्री बनाए गए हैं। वहीं दलित और ओबीसी समुदाय से 7-7 नेताओं को जगह मिली है। सवर्ण वर्ग से 9 मंत्री बनाए गए हैं।
सवर्ण नेताओं को भी अहम जिम्मेदारी
भूमिहार समाज से विजय चौधरी, विजय सिन्हा और कुमार शैलेन्द्र को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। वहीं ब्राह्मण समाज से नीतीश मिश्रा और मिथिलेश तिवारी को जगह मिली है। राजपूत समुदाय से लेसी सिंह, संजय सिंह टाइगर, श्रेयसी सिंह और संजय कुमार सिंह को मंत्री बनाया गया है। इस प्रकार कुल 9 लोगों को सवर्ण वर्ग से मंत्री बनाया गया है।
ओबीसी वर्ग को मजबूत प्रतिनिधित्व
कुर्मी समाज से श्रवण कुमार और निशांत को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। यादव समुदाय से विजेंद्र यादव और रामकृपाल यादव को जगह मिली है। वहीं कुशवाहा समाज से भगवान सिंह कुशवाहा और दीपक प्रकाश मंत्री बने हैं। वैश्य समाज से रामचंद्र प्रसाद को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
EBC वर्ग पर सबसे ज्यादा फोकस
EBC वर्ग से दिलीप कुमार जायसवाल, केदार गुप्ता (कानू), प्रमोद चंद्रवंशी, अरुण शंकर प्रसाद (सूढ़ी) और श्वेता गुप्ता (तलवार) को मंत्री बनाया गया है। मल्लाह समाज से रमा निषाद और मदन सहनी को जगह मिली है। धानुक समाज से शीला मंडल और दामोदर रावत मंत्री बने हैं, जबकि गंगोता समाज से बुलो मंडल को प्रतिनिधित्व दिया गया है। ये सभी जातियों ईबीसी में आती हैं।
दलित और अल्पसंख्यक समुदाय को भी हिस्सेदारी
दलित वर्ग से अशोक चौधरी, रत्नेश सादा, सुनील कुमार, नंद किशोर राम, लखेन्द्र पासवान, संतोष सुमन और संजय कुमार को मंत्री बनाया गया है। इस प्रकार कुल 7 दलित वर्ग के नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। वहीं अल्पसंख्यक समुदाय से जमा खान को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।
बिहार के नए मंत्रिमंडल की संरचना को NDA की सामाजिक इंजीनियरिंग की बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार ने विभिन्न जातीय समूहों को साधने के जरिए व्यापक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।