पटना में चैती छठ की तैयारी पूरी: ड्रोन और CCTV की जद में होंगे गंगा घाट,DM का सख्त निर्देश बना गया कंट्रोल रूम
Chaiti Chhath 2026: पटना में चैती छठ की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। करीब 100 गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था, CCTV कैमरे और ड्रोन से निगरानी करने का निर्देश दिया गया है.22 मार्च से 25 मार्च तक गंगा नदी में नाव का परिचालन नहीं होगा.
राजधानी पटना में चैती छठ की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। महापर्व की शुरुआत 22 मार्च को नहाय-खाय के साथ होगी, जिसके बाद 23 मार्च को खरना का अनुष्ठान किया जाएगा। व्रत के तीसरे दिन यानी 24 मार्च को शाम का अर्घ्य और 25 मार्च की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन होगा। पटना के दानापुर से लेकर दीदारगंज तक के करीब 100 गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है।
प्रशासन की चेतावनी: 8 घाट 'खतरनाक' घोषित
जिला प्रशासन ने गहन निरीक्षण के बाद सुरक्षा के मद्देनजर पटना के 8 गंगा घाटों को खतरनाक घोषित किया है। इन घाटों में एलसीटी घाट, राजापुर पुल घाट, पहलवान घाट, बांस घाट, शिव घाट, दीदारगंज घाट पूर्वी, रिकाबगंज घाट और बुंदेलटोली घाट शामिल हैं। डीएम त्यागराजन एसएम ने स्पष्ट किया है कि इन घाटों पर पानी के स्तर और ढलान को देखते हुए श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है और यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे।
सुरक्षा घेरा: ड्रोन से निगरानी और नावों पर रोक
छठ पर्व के दौरान गंगा में होने वाली भीड़ को देखते हुए 22 से 25 मार्च तक निजी नावों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी। घाटों पर एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF) और गोताखोरों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। साथ ही रिवर पेट्रोलिंग और मेडिकल टीमों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
जिला नियंत्रण कक्ष: 24 घंटे सहायता उपलब्ध
किसी भी सहायता या सूचना के लिए पटना जिला प्रशासन ने 24x7 सक्रिय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। श्रद्धालु जिला नियंत्रण कक्ष के नंबर (0612-2219810/ 2219234) या डायल-112 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा जिला आपातकालीन संचालन केंद्र का नंबर (0612-2210118) भी जारी किया गया है। डीएम ने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि तालाबों और नदी घाटों पर लाइफ जैकेट और जाल जैसे संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।