कानूनी डर से महागठबंधन विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में नहीं डाला वोट ! किसी का हत्या में नाम तो किसी के MLA बने रहने पर खतरा
राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के 4 विधायक गायब रहे. RJD विधायक फैसल रहमान, कांग्रेस के 3 विधायक- मनोहर प्रसाद, मनोज विश्वास और सुरेंद्र कुशवाहा विधानसभा ही नहीं पहुंचे. जानिए खास वजह
Bihar Rajya Sabha Election : बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और राजद के चार विधायकों ने अपने गठबंधन के प्रत्याशी एडी सिंह को वोट नहीं दिया. वे मतदान के दौरान गायब रहे. मतदान से गायब रहने वाले विधायकों में कांग्रेस के 3 और राजद के 1 विधायक हैं. महागठबंधन के 4 विधायक गायब रहे. RJD ने अपने विधायक फैसल रहमान, कांग्रेस के 3 विधायक- मनोहर प्रसाद, मनोज विश्वास और सुरेंद्र कुशवाहा विधानसभा ही नहीं पहुंचे.
भूमिहार थे इसलिए वोट नहीं दिया
इन विधायकों द्वारा अब अलग अलग तर्क गढ़ा जा रहा है कि वे किन वजहों से वोटिंग से अनुपस्थित रहे. कोई कह रहा है कि राजद उम्मीदवार एडी सिंह भूमिहार थे इसलिए वोट नहीं दिया तो कोई कह रहा है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा था कि आप स्वतंत्र हैं. वहीं राजद विधायक कह रहे हैं कि मेरी माँ बीमार थी इसलिए वोट देने नहीं आया.
पटना हाई कोर्ट में केस
हालांकि विधायकों के दावे और जमीनी सच्चाई के कई प्रकार के अंतर बताए जा रहे हैं. सियासी हलकों में दावा किया जा रहा है कुछ विधायकों से जुड़ा हुआ आपराधिक मामला और चुनाव में कम वोटों से जीत का अंतर ऐसा पेंच रहा जिसने इन विधायकों पर दबाब बनाया कि वे राज्यसभा चुनाव में एडी सिंह के पक्ष के वोट न करके अनुपस्थित हो जाएं. कांग्रेस के फारबिसगंज के विधायक मनोज विश्वास मात्र 221 वोट के अंतर से जीते थे. वहीं ढाका के विधायक फैज़ल रहमान सिर्फ 178 वोट से चुनाव जीते.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम के बाद मनोज विश्वास और फैज़ल रहमान दोनों के खिलाफ पटना हाई कोर्ट में केस चल रहा है. इसमें प्रतिद्वंद्वी पक्ष की ओर से दावा किया गया कि कुछ बूथों पर ऐसे मतदाताओं के वोट पड़े जिनकी मृत्यु हो चुकी है या फिर मतदान के समय बिहार से बाहर थे या दो बूथों पर ऐसे मतदाताओं का नाम था. अगर हाई कोर्ट में चल रहे मामले में यह सिद्ध हो जाता है तो दोनों विधायक मनोज विश्वास और फैज़ल रहमान की विधानसभा सदस्यता रद्द हो सकती है.
अपराधिक मामलों में भी नाम
ढाका के विधायक फैज़ल रहमान का नाम सबसे पहले वर्ष 2007 में सुर्ख़ियों में आया था. असम के गुवाहाटी में होटल व्यवसायी प्रभात कुमार सिंह की हत्या हुई थी. इस मामले में गिरफ्तार किए गए मनीष रंजन शर्मा उर्फ़ मुन्ना ने पुलिस को बताया था कि उसे राजद के राज्यसभा सांसद मोतीउर रहमान के बेटे फैज़ल रहमान ने हत्या के लिए सुपारी दी थी. फैज़ल रहमान और प्रभात दोनों के एक ही लड़की को पसंद करने की बात आई थी जिसके बाद प्रभात की हत्या हो गई. हालांकि बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. ऐसे में यह एक ऐसा मामला है जो फैजल रहमान की मुश्किलें अभी भी बढ़ा सकता है. इसी तरह मनोज विश्वास ने भी चुनावी हलफनामे में बताया है कि उनके खिलाफ दो मामले हैं.
सियासी जानकारों का मानना है कि संभव है कि इन कारणों से भी मनोज विश्वास और फैज़ल रहमान ने चुनाव में वोट ना डालने के निर्णय किया हो. अगर वे एडी सिंह के पक्ष में वोट डालते तो उनके खिलाफ हाई कोर्ट में चल रहा केस और अन्य मामले मुसीबतों को बढ़ाने वाला बन सकता है.