Bihar News : पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ‘दांगी’ और ‘कुशवाहा’ अलग-अलग जातियां, OBC उम्मीदवार EBC आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने का हकदार नहीं

PATNA : पटना हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसला में कहा है कि दांगी और कुशवाहा दो अलग अलग जाति हैं। कुशवाहा ओबीसी के तहत आता हैं, तो दांगी ईबीसी के तहत। कोर्ट ने कहा कि ईबीसी के लिए आरक्षित सीट पर ओबीसी समुदाय से तालुक रखने वाले मुखिया के पद पर चुनाव लड़ने के हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने आवेदक के दावे को निराधार करार देते हुए अर्जी को खारिज कर दिया।

जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेन्द्र सिंह की खंडपीठ ने पश्चिमी चंपारण के बैरिया प्रखंड के बगही बघमहारपुर ग्राम पंचायत के मुखिया मनोज प्रसाद की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। गौरतलब है कि आवेदकवर्ष 2021 में पश्चिम चंपारण जिले के बागही बाघंबरपुर ग्राम पंचायत राज से मुखिया निर्वाचित हुआ था।लेकिन उसी पंचायत के संतोष कुमार  ने जाति के आधार पर निर्वाचन को चुनौती दी।

 ये कहा गया कि अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट से जाली जाति  प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ जीत हासिल किया गया है। उन्होंने उनके निर्वाचन को निरस्त करने का गुहार राज्य निर्वाचन आयोग से लगाया। उनका कहना था कि आवेदक दांगी जाति के बजाये कोइरी (कुशवाहा) जाति से आते हैं। आवेदक के शिकायत पर आयोग ने तीन सदस्यी कमेटी से जांच कराई। कमेटी ने अपने रिपोर्ट में कहा कि आवेदक  कुशवाहा ओबीसी जाति से आते हैं।

दांगी कोईरी जाति का एक उपजाति है और इसे 1995 में ओबीसी में शामिल किया गया था। बिहार में दांगी जाति बहुत पहले से ओबीसी में था।  लेकिन नीतीश राज में दांगी को ईबीसी अति पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया था। पंचायत में अत्यंत पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर ओबीसी समुदाय के लोग चुनाव नहीं लड़ सकते।