शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का बड़ा ऐलान: 'शिक्षकों को 1 सप्ताह में सचिवालय बुलाकर अधिकारियों के साथ बैठाएंगे, तत्काल होगा फैसला'

Bihar News : एक सार्वजनिक मंच से शिक्षकों को संबोधित करते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने शिक्षकों को लेकर बड़ी बात कही। उन्होने कहा कि हमारी नजर में शिक्षक वह मोमबत्ती है जो खुद जलकर दूसरों को रोशनी प्रदान करती है...

Patna : बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षकों के सम्मान और उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा ऐलान किया है। एक सार्वजनिक मंच से शिक्षकों को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा, "एक सप्ताह के भीतर हम आपको सचिवालय बुलाएंगे, शिक्षा मंत्री की तरफ से आपको चाय पिलाएंगे और जलपान करवाएंगे।" उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिक्षकों को अब अपनी मांगों के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है, बल्कि सरकार खुद पहल कर उनके मुद्दों को सुलझाएगी।


अधिकारियों के साथ बैठक में तत्काल लिया जाएगा निर्णय

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सचिवालय में होने वाली यह बैठक केवल औपचारिक नहीं होगी, बल्कि इसमें विभाग के आला अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने मंच से घोषणा की कि शिक्षकों को अधिकारियों के साथ आमने-सामने बैठाया जाएगा ताकि दोनों पक्षों की बातें पारदर्शी तरीके से सुनी जा सकें। मिथिलेश तिवारी ने दृढ़ता के साथ कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को लेकर जो भी उचित और नियमानुकूल निर्णय हो सकता है, वह उसी दिन तत्काल रूप से मौके पर ही ले लिया जाएगा।


शिक्षक समाज के लिए मोमबत्ती के समान: शिक्षा मंत्री

संबोधन के दौरान शिक्षा मंत्री शिक्षकों के प्रति बेहद भावुक और आदरपूर्ण नजर आए। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा, "हमारी नजर में शिक्षक वह मोमबत्ती है जो खुद जलकर दूसरों को रोशनी प्रदान करती है।" उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का वह आधार स्तंभ हैं जो खुद तमाम कठिनाइयां झेलकर भी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को संवारने और उन्हें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का काम करते हैं।


"सड़कों पर संघर्ष नहीं, विद्यालयों में शिक्षा की लौ जलाना आपका काम"

शिक्षकों के आंदोलन और धरने पर बैठने की स्थिति पर बात करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों का स्थान चिलचिलाती धूप में सड़कों पर संघर्ष करने के लिए नहीं है। आपका वास्तविक और आदरणीय स्थान विद्यालयों में बैठकर शिक्षा-दीक्षा की लौ को निरंतर जलाए रखने का है। सरकार की मंशा है कि शिक्षकों को अपनी जायज मांगों के लिए सड़कों पर न उतरना पड़े, बल्कि वे पूरे सम्मान के साथ स्कूलों में रहकर बच्चों के भविष्य निर्माण पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकें।


झोपड़ी में बैठी प्रतिभाओं को निखारने और अधिक काम करने की अपेक्षा

अंत में, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षकों को उनकी सामाजिक जिम्मेदारी की याद दिलाते हुए उनसे और अधिक मेहनत करने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि देश और राज्य के विकास के लिए आपको और अधिक काम करने की जरूरत है, क्योंकि आपका मुख्य दायित्व झोपड़ी में बैठे हुए गरीब और वंचित समाज की प्रतिभाओं को तराशना और उन्हें निखारना है। सरकार शिक्षकों के मान-सम्मान और हक की पूरी चिंता करेगी, बदले में शिक्षक भी शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लें।


नरोत्तम कुमार की रिपोर्ट