Bihar Inflation: त्योहारों पर महंगाई का डबल अटैक! रसोई से बाजार तक बिगड़ा बजट, लोगों की थाली पर संकट, गृहिणियां परेशान- छोटे दुकानदारों की बिक्री पर भी असर

Bihar Inflation: दिवाली और छठ की खुशियों पर महंगाई की मार, रसोई से बाजार तक बिगड़ा बजट; सितंबर में ग्रामीण खुदरा महंगाई 6.08% और खाद्य महंगाई 8.06% दर्ज, गृहिणियां परेशान तो छोटे दुकानदारों की बिक्री पर भी असर

थाली छोटी, खर्च बड़ा;- फोटो : X

Bihar Inflation: शारदीय नवरात्र, दिवाली और लोक आस्था के महापर्व छठ की तैयारियों के बीच महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जिन घरों में इन दिनों साफ-सफाई, नए कपड़ों, मिठाइयों और पूजा सामग्री की खरीदारी की तैयारी होनी चाहिए, वहां अब राशन के बजट का हिसाब लगाया जा रहा है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले चावल, दाल, आटा, सब्जियों और मसालों से लेकर मिठाई और उपहार तक का खर्च परिवारों की जेब पर भारी पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी सीमित आमदनी वाले परिवारों को हो रही है, जिन्हें रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के साथ त्योहारों का खर्च भी संभालना है।

शहरों से ज्यादा गांवों में महंगाई की मार

महंगाई की सबसे चिंताजनक तस्वीर ग्रामीण इलाकों से सामने आई है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 6.08 फीसदी पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 5.24 फीसदी थी। दूसरी ओर, शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.31 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 4.88 फीसदी दर्ज की गई।खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई ने भी ग्रामीण परिवारों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। सितंबर में ग्रामीण खाद्य महंगाई दर 8.06 फीसदी रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 7.18 फीसदी दर्ज की गई। यानी खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव गांवों में अपेक्षाकृत ज्यादा रहा। ग्रामीण परिवारों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि सीमित और अनियमित आय के बीच रोजमर्रा के खर्चों को संभालना आसान नहीं होता।

चावल 20 से 45 रुपये किलो, प्याज 60 रुपये तक

बाजार में जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर भी उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी है। दुकानदारों के मुताबिक, चावल की कीमत पिछले साल करीब 20 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर लगभग 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसी तरह प्याज के दाम में भी पिछले छह महीनों के दौरान बढ़ोतरी की बात कही जा रही है।दुकानदारों के अनुसार, पहले 10 से 20 रुपये प्रति किलो मिलने वाला प्याज अब 55 से 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। हालांकि, अलग-अलग किस्म, गुणवत्ता और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर हो सकता है। इन बढ़ती कीमतों का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके मासिक बजट में राशन और सब्जियों का बड़ा हिस्सा होता है।

थाली छोटी, खर्च बड़ा; गृहिणियों की बढ़ी परेशानी

महंगाई का असर अब परिवारों की खरीदारी के तौर-तरीकों पर भी दिखाई देने लगा है। पहले जो परिवार महीने भर का राशन एक साथ खरीद लेते थे, वे अब जरूरत के हिसाब से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सामान खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। कहीं एक किलो की जगह 500 ग्राम तो कहीं 250 ग्राम सामान खरीदकर खर्च चलाने की कोशिश की जा रही है।

पटना की खाद्यान्न मंडी में खरीदारी करने पहुंची एक महिला ने अपनी परेशानी जाहिर करते हुए कहा, "किस चीज का दाम नहीं बढ़ा है? हर चीज के दाम बढ़ गए हैं। महंगाई बढ़ने से हमारा किचन बहुत प्रभावित हुआ है।"रसोई का बजट संभालने वाली गृहिणियों के लिए प्याज, लहसुन, अदरक और दूसरी सब्जियों की बढ़ती कीमतें बड़ी चुनौती बन गई हैं। कई परिवारों को भोजन में इन चीजों की मात्रा कम करनी पड़ रही है या सस्ते विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं।

गरीब, मध्यमवर्ग और मजदूर—सब पर बढ़ा बोझ

महंगाई की मार केवल गृहिणियों तक सीमित नहीं है। नौकरीपेशा मध्यमवर्गीय परिवार बचत और खर्च के बीच संतुलन बनाने में जुटे हैं, जबकि दिहाड़ी मजदूरों के लिए रोज की कमाई से घर चलाना और मुश्किल होता जा रहा है। जब राशन, सब्जियों और दूसरी जरूरी वस्तुओं पर खर्च बढ़ता है, तो शिक्षा, इलाज और बचत जैसी जरूरतों के लिए उपलब्ध रकम भी कम हो जाती है।बाजार में कीमतों का दबाव छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को भी प्रभावित कर सकता है। ग्राहकों की खरीदारी क्षमता घटने पर लोग जरूरत का सामान तो खरीदते हैं, लेकिन गैर-जरूरी वस्तुओं और त्योहारों की अतिरिक्त खरीदारी में कटौती करने लगते हैं।

राजद ने महंगाई को बताया आम आदमी की गंभीर समस्या

बिहार में प्रमुख विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने भी महंगाई को आम आदमी के लिए गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि इसका बोझ गरीबों, मध्यमवर्गीय परिवारों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहा है। उनके मुताबिक, रोज कमाकर खाने वाले लोगों के लिए घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है और बाजार में कीमतों की अस्थिरता हर वर्ग को प्रभावित कर रही है।शक्ति सिंह यादव ने कहा कि आम लोगों के लिए 200 से 500 रुपये में भी घर का खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है।

त्योहारों की खुशियों के बीच बजट की चिंता

दिवाली और छठ जैसे पर्व बिहार में केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवारों के मिलन, खरीदारी और परंपराओं से भी जुड़े हैं। ऐसे में जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतें त्योहारों की तैयारियों को प्रभावित कर रही हैं। सीमित आमदनी वाले परिवारों के सामने अब सवाल है कि वे रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करें, बच्चों के लिए कपड़े खरीदें या पूजा और पकवानों का खर्च उठाएं।ग्रामीण और शहरी महंगाई के आंकड़े बताते हैं कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। त्योहारों के इस मौसम में आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल बढ़ता खर्च परिवारों के बजट की परीक्षा ले रहा है।