शिक्षा विभाग में कुर्सी का खेल जारी, 4 महीने में 5 IAS अफसर बदले, इस कारण सीनियर हटे, जूनियर को मिली कमान…
Bihar Education Department: सियासी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि मंत्री ऐसी टीम तैयार करना चाहते हैं जिसके साथ बेहतर तालमेल हो और सरकार की शिक्षा संबंधी प्राथमिकताओं को तेजी से जमीन पर उतारा जा सके। ...
Bihar Education Department: पटना के सत्ता गलियारों में इन दिनों बिहार का शिक्षा विभाग चर्चा के केंद्र में है। 15 अप्रैल 2026 को मिथिलेश तिवारी के शिक्षा मंत्री की कुर्सी संभालने के बाद महज चार महीनों में विभाग के शीर्ष स्तर पर पांच IAS अधिकारियों के तबादले ने प्रशासनिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सीनियर अधिकारियों को हटाकर जूनियर अफसरों को अहम जिम्मेदारियां दिए जाने से यह चर्चा तेज है कि शिक्षा मंत्री अपनी प्राथमिकताओं के मुताबिक नई प्रशासनिक टीम तैयार कर रहे हैं।सबसे ताजा बदलाव 28 अगस्त 2026 को हुआ। 2015 बैच के IAS अधिकारी सज्जन राजशेखर को माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पद से हटा दिया गया और उनकी जगह 2018 बैच के IAS अधिकारी नितिन कुमार सिंह को जिम्मेदारी दी गई। नितिन कुमार सिंह इससे पहले वेटिंग फॉर पोस्टिंग में थे। इस बदलाव ने विभाग के भीतर चल रही प्रशासनिक हलचल को फिर सुर्खियों में ला दिया।
सियासी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि मंत्री ऐसी टीम तैयार करना चाहते हैं जिसके साथ बेहतर तालमेल हो और सरकार की शिक्षा संबंधी प्राथमिकताओं को तेजी से जमीन पर उतारा जा सके। हालांकि अधिकारियों के तबादले सरकार का प्रशासनिक अधिकार है और किसी अधिकारी को हटाने की आधिकारिक वजह अलग से बताई जाए, यह जरूरी नहीं है। इसलिए इन बदलावों को सीधे मंत्री-अधिकारी टकराव से जोड़ना फिलहाल सिर्फ चर्चा है।
शिक्षा विभाग में बदलावों का सिलसिला पहले ही शुरू हो चुका था। 30 अगस्त 2025 को डॉ. बी. राजेंद्र को एस. सिद्धार्थ की जगह शिक्षा विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया था। उन्होंने 1 सितंबर 2025 को जिम्मेदारी संभाली। स्कूलों की स्थिति और शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर सीधी निगरानी के उनके तरीके की काफी चर्चा हुई।वह स्कूल टाइम में शिक्षकों को सीधे फोन कर स्कूल की स्थिति और कामकाज की जानकारी लेते थे। बाद में उन्हें शिक्षा विभाग से हटाकर बिहार का विकास आयुक्त बनाया गया।15 मई 2026 को डॉ. बी. राजेंद्र को शिक्षा विभाग से मुक्त कर दिया गया और उनकी जगह 2007 बैच के IAS अधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल को शिक्षा सचिव बनाया गया। लेकिन यह व्यवस्था भी ज्यादा लंबी नहीं चली।करीब दो महीने बाद जुलाई 2026 में शिक्षा विभाग की कमान 2010 बैच के IAS अधिकारी राजीव रौशन को सौंप दी गई। यानी सचिव स्तर पर भी बदलावों की रफ्तार ने सवाल खड़े किए।
शिक्षा विभाग में प्रशासनिक फेरबदल की सबसे चर्चित कड़ी 18 जून 2026 की रही, जब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति यानी BSEB के अध्यक्ष आनंद किशोर को पद से हटा दिया गया। उन्हें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया।उनकी जगह तत्कालीन पटना जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम को BSEB का नया अध्यक्ष बनाया गया। उन्हें वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया।सियासी गलियारों में यह चर्चा भी चली कि मंत्री और आनंद किशोर के बीच तालमेल को लेकर मतभेद थे। हालांकि इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल महज राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है।
इसके बाद 28 अगस्त 2026 को सज्जन राजशेखर को माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पद से हटा दिया गया। वह 8 अक्टूबर 2025 से इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक के तौर पर उनकी जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा, शिक्षकों से जुड़े प्रशासनिक मामलों और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी थी।विभागीय सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि शिक्षक ट्रांसफर, स्कूलों की सुविधाओं और कुछ नीतिगत फैसलों को लेकर मंत्री और सज्जन राजशेखर के बीच सहमति नहीं बन रही थी। लेकिन इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
18 जून 2026 को 2019 बैच के IAS अधिकारी विक्रम विरकर का तबादला किया गया। वह दिसंबर 2025 में प्राथमिक शिक्षा निदेशक बने थे। तबादले के बाद उन्हें खगड़िया का जिलाधिकारी बनाया गया।इस तरह शिक्षा विभाग के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में लगातार हुए फेरबदल ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या शिक्षा मंत्री अपनी पसंद और कार्यशैली के मुताबिक अधिकारियों की नई टीम तैयार कर रहे हैं?मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए मंत्री को काम करने की आजादी मिलने की चर्चा भी इन बदलावों के साथ जोड़कर देखी जा रही है। शिक्षा विभाग जैसे विशाल महकमे में नीतियों को जमीन पर उतारने के लिए मंत्री और नौकरशाही के बीच बेहतर तालमेल जरूरी माना जाता है।
फिलहाल चार महीनों में पांच IAS अधिकारियों के बदलाव ने विभाग में हलचल जरूर पैदा कर दी है। अब असली परीक्षा यह होगी कि नई टीम आने के बाद स्कूलों की बदहाल व्यवस्था, शिक्षकों की समस्याओं, ट्रांसफर-पोस्टिंग और शिक्षा सुधार के मोर्चे पर कितना बदलाव दिखाई देता है।कुर्सियां बदलने का सिलसिला अगर सिर्फ फाइलों और आदेशों तक सीमित रहा तो सवाल बरकरार रहेंगे। लेकिन अगर नई टीम के साथ शिक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार जमीन पर उतरते हैं, तो यही फेरबदल सरकार की रणनीतिक कवायद साबित हो सकते हैं। फिलहाल पटना के प्रशासनिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है—ये महज तबादले हैं या शिक्षा विभाग में नई सत्ता-व्यवस्था की नींव रखी जा रही है?