Bihar News : पूर्व IPS अमिताभ दास ने प्रधानमंत्री को पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी, जेफरी एप्सटीन मामले का दिया हवाला

Bihar News : पूर्व IPS अमिताभ दास की राष्ट्रपति को लिखी गयी चिट्ठी से हड़कंप मच गया है. उन्होंने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को पद से हटाने की मांग की है.......पढ़िए आगे

पीएम मोदी को हटाने की मांग - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार कैडर के 1994 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी और 'बिहार विप्लवी परिषद' के चेयरमैन अमिताभ कुमार दास ने एक बार फिर अपने तेवरों से राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है। अमिताभ दास ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक औपचारिक पत्र लिखकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तत्काल प्रभाव से पद से बर्खास्त करने की मांग की है। 9 फरवरी 2026 की तिथि वाले इस पत्र में उन्होंने बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

पत्र के माध्यम से पूर्व आईपीएस ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री ने अमेरिकी व्यवसायी जेफरी एप्सटीन के निजी टापू पर कथित तौर पर अनैतिक कृत्यों में संलिप्तता दिखाई थी। पत्र में इन आरोपों को आधार बनाते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए अत्यंत कड़े शब्दों का प्रयोग किया है। अमिताभ कुमार दास का दावा है कि उनके पास इस संबंध में सूचनाएं हैं, जिन्हें आधार बनाकर उन्होंने राष्ट्रपति से संवैधानिक हस्तक्षेप की अपील की है।

अमिताभ दास ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में, जहां वर्तमान में एक महिला राष्ट्रपति का कार्यकाल है, ऐसे गंभीर आरोपों से घिरे व्यक्ति का प्रधानमंत्री पद पर बने रहना लज्जाजनक है। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे अपनी संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करें और गरिमा की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री को पदमुक्त करें। पत्र का विषय भी इसी मांग को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।

विदित हो कि अमिताभ कुमार दास अक्सर अपनी बेबाक बयानबाजी और व्यवस्था के खिलाफ पत्र लिखने के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले भी वे कई बड़े राजनेताओं और अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं, जिसके कारण वे चर्चा और विवादों में रहे हैं। उनके इस ताजा पत्र ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद को निशाना बनाया गया है। फिलहाल इस पत्र पर राष्ट्रपति भवन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, एक पूर्व पुलिस अधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री जैसे पद के विरुद्ध इस तरह के गंभीर और व्यक्तिगत आरोपों वाले पत्र को लेकर कानूनी और राजनीतिक जानकार इसे एक बेहद विवादास्पद कदम मान रहे हैं।