Bihar Cabinet Expansion: डॉक्टर से मंत्री तक का सफर, श्वेता गुप्ता समेत इन नए चेहरों की सम्राट कैबिनेट में एंट्री
Bihar Cabinet Expansion: सबसे चर्चित नामों में निशांत कुमार का नाम सामने आ रहा है, जो पहली बार कैबिनेट में जगह बना रहे हैं। इसके अलावा शिवहर से विधायक श्वेता गुप्ता भी मंत्री पद की शपथ लेने जा रही हैं।
Bihar Cabinet Expansion: बिहार की सियासत आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार में 31 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जा रही है। गांधी मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह को सत्ता के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है, जहां पूरी राजनीतिक दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।नई कैबिनेट में भाजपा, जदयू और सहयोगी दलों के बीच संतुलन साधते हुए मंत्रालयों का बंटवारा किया गया है। भाजपा कोटे से 14, जदयू से 13, लोजपा (रामविलास) से दो, हम से एक और आरएलएम से एक मंत्री शामिल किए गए हैं। यह विस्तार आने वाले राजनीतिक समीकरणों को साधने की बड़ी रणनीति माना जा रहा है।लोजपा (आर) से संजय सिंह और संजय पासवान को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं हम से संतोष सुमन और आरएलएम से दीपक प्रकाश को कैबिनेट में जगह मिली है।
इस बार सबसे ज्यादा चर्चा नए चेहरों की एंट्री को लेकर है। कई ऐसे नेता पहली बार मंत्री बन रहे हैं, जिनमें राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों तरह की पृष्ठभूमि वाले चेहरे शामिल हैं।सबसे चर्चित नामों में निशांत कुमार का नाम सामने आ रहा है, जो पहली बार कैबिनेट में जगह बना रहे हैं। इसके अलावा शिवहर से विधायक श्वेता गुप्ता भी मंत्री पद की शपथ लेने जा रही हैं।
श्वेता गुप्ता पेशे से डॉक्टर हैं और मूल रूप से सीतामढ़ी की रहने वाली हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने आरजेडी के नवनीत कुमार को 31,398 वोटों के बड़े अंतर से हराकर शानदार जीत दर्ज की थी। इससे पहले इस सीट से चेतन आनंद का प्रभाव रहा था, लेकिन इस बार समीकरण पूरी तरह बदल गए।
भाजपा खेमे से भी कई नए चेहरों को मौका मिला है, जिनमें मिथिलेश तिवारी और नंद किशोर यादव जैसे नाम शामिल हैं।श्वेता गुप्ता की संपत्ति भी चर्चा में है उनकी कुल संपत्ति करीब 28.4 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिसमें 6.6 करोड़ की चल संपत्ति और 21.8 करोड़ की अचल संपत्ति शामिल है।
आज का यह शपथ ग्रहण केवल कैबिनेट विस्तार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए चेहरे, नए समीकरण और नई सियासी दिशा का संकेत माना जा रहा है।