Bihar Politics: मुख्यमंत्री के गमछा पॉलिटिक्स से बिहार में सियासी तूफान, रोहिणी आचार्या का विवादास्पद पलटवार, राजनीतिक तापमान बढ़ा

Bihar Politics:राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्या ने गमछा पॉलिटिक्स पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं....

मुख्यमंत्री के गमछा पॉलिटिक्स से बिहार में सियासी तूफान- फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की सियासत एक बार फिर गमछा पॉलिटिक्स के इर्द-गिर्द गर्मा गई है। ऊर्जा भवन, पटना में आयोजित एआई समिट के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा दिए गए एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मंच से एआई और निगरानी तकनीक का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पटना में करीब चार हजार एआई कैमरे लगाए गए हैं और यदि एआई को यह निर्देश दिया जाए कि हरे गमछा वालों को खोजो, तो वह तुरंत पहचान कर कार्रवाई तक कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका इशारा किसी विशेष वर्ग की ओर नहीं था।

इस बयान के बाद सियासी पारा चढ़ गया और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्या ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भगवा गमछा का उल्लेख करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि कानून-व्यवस्था के नाम पर एक विशेष रंग और पहचान को टारगेट करने की कोशिश की जा रही है।

रोहिणी आचार्या ने अपने पोस्ट में लिखा कि अपराध और माफिया तत्वों को किसी एक रंग या पहचान से जोड़कर देखना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में असली अपराधियों पर कार्रवाई के बजाय राजनीतिक विरोधियों को डराने और टारगेट करने की भाषा इस्तेमाल की जा रही है। उन्होंने इसे पूर्वाग्रह से प्रेरित और दुर्भाग्यपूर्ण बयान करार देते हुए कहा कि बिहार की जनता इस तरह की राजनीति का जवाब देगी।



उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर समर्थक और विरोधी दोनों ही खेमों में बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे पूरी तरह राजनीतिक बयानबाज़ी बता रहे हैं तो कुछ इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।

दूसरी ओर, सीएम के बयान को लेकर सत्ता पक्ष का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था पर प्रकाश डालना था, न कि किसी समुदाय या वर्ग को निशाना बनाना।फिलहाल गमछा विवाद बिहार की राजनीति में नया सियासी मुद्दा बनकर उभरा है, जिसने एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाज़ी की जंग को तेज कर दिया है।