माँ की याद में गौरव राय की नेक पहल, जरूरतमंद महिला को सिलाई मशीन और बच्चों को बांटे कपड़े-जूते

गौरव राय ने बताया कि लोग अपनी खुशी या अपनों की याद में जरूरतमंदों की सहायता के लिए उनसे संपर्क करते हैं। उनके अनुसार, सिलाई मशीनों के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

Gaurav Rai - फोटो : news4nation

Bihar News :  पटना में रहने वाले गौरव राय ने अपनी स्वर्गीय मां के जन्मदिन को सेवा और सहयोग के रूप में मनाया। इस अवसर पर उन्होंने जहानाबाद जिले के मोदनगंज प्रखंड के वैना गांव में एक जरूरतमंद महिला को सिलाई मशीन उपलब्ध कराई। वहीं, पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने वाले चार बच्चों को कॉपी, पेन और ज्योमैट्री बॉक्स दिए। इसके अलावा सारण के जनता बाजार स्थित स्वामी विवेकानंद इंग्लिश स्कूल में भी बच्चों के बीच ज्योमैट्री बॉक्स बांटे गए। कुछ बच्चों को कपड़े और जूते भी दिए गए।


गौरव राय ने बताया कि कुछ दिन पहले वैना गांव के राहुल का निधन हो गया था। परिवार से बातचीत के बाद उन्होंने राहुल की पत्नी को स्वरोजगार के लिए सिलाई मशीन देने का वादा किया था। तबीयत ठीक नहीं होने के कारण मशीन उनके परिजनों को सौंपी गई। उन्होंने बताया कि राहुल की बेटी के भविष्य के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट कराया गया है और हर महीने 2,000 रुपये जमा किए जा रहे हैं।


बच्चों को प्रोत्साहित करना ही सच्ची श्रद्धांजलि

सारण के स्वामी विवेकानंद इंग्लिश स्कूल में बच्चों के बीच ज्योमैट्री बॉक्स का वितरण किया गया। स्कूल के प्राचार्य चंदन वर्मा ने गौरव राय की पहल की सराहना करते हुए बताया कि वे पहले भी स्कूल में छात्राओं के लिए सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन लगवा चुके हैं। गौरव ने अपने कार्यालय के आसपास रहने वाले बच्चों को भी कपड़े और जूते दिए। उनका मानना है कि छोटे-छोटे प्रोत्साहन बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

बिना एनजीओ जरूरतमंदों की मदद 

गौरव राय ने बताया कि लोग अपनी खुशी या अपनों की याद में जरूरतमंदों की सहायता के लिए उनसे संपर्क करते हैं। उनके अनुसार, सिलाई मशीनों के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस अभियान के तहत अब तक 350 सिलाई मशीनें उपलब्ध कराने की पहल की गई है। इसके अलावा 328 साइकिलें और स्कूल-कॉलेजों में 152 सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें लगवाई जा चुकी हैं।

एक निजी कंपनी में कार्यरत गौरव राय अब तक 107 बार रक्तदान कर चुके हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से दूसरों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि बिना किसी एनजीओ के आसपास के जरूरतमंदों की मदद करना और उनके चेहरे पर मुस्कान लाना ही उनके लिए मां की याद को जीवित रखने और नारायण की सेवा करने का सबसे अच्छा तरीका है।