GTRI 6.0 : बिहार में निवेश की नई आंधी!मनी, मार्केट और मोमेंटम से बिहार 2035 तक, GTRI 6.0 में गूंजा नए बिहार का विजन ,AI और प्रवासी पूंजी पर बड़ा रोडमैप तैयार
GTRI 6.0 : ग्रैंड ट्रंक रोड इनिशिएटिव्स के क्यूरेटर अदिति नंदन ने बिहार की पहचान को लेकर एक नया नैरेटिव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि बिहार को केवल गरीबी, पलायन और पिछड़ेपन के नजरिए से देखना राज्य के साथ अन्याय है। ...
GTRI 6.0 :पटना के लेमन ट्री प्रीमियर होटल में आयोजित ग्रैंड ट्रंक रोड इनिशिएटिव्स (GTRI 6.0) का छठा संस्करण केवल एक सम्मेलन भर नहीं था, बल्कि यह बिहार के आर्थिक, सामाजिक और संस्थागत भविष्य को लेकर एक गंभीर चिंतन और व्यापक विमर्श का मंच साबित हुआ। मनी, मार्केट और मोमेंटम की थीम पर आयोजित इस एक दिवसीय शिखर सम्मेलन में नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, उद्योगपतियों, निवेशकों, स्टार्टअप उद्यमियों और सामाजिक चिंतकों ने बिहार के भविष्य की दिशा और दशा पर गहन चर्चा की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और बिहार जर्नल एडिशन-03 के विमोचन के साथ हुआ। सम्मेलन का मूल उद्देश्य बिहार की आर्थिक संरचना, फिनटेक, कृषि वित्त, प्रवासी पूंजी, स्टार्टअप इकोसिस्टम और ‘बिहार 2035 रोडमैप’ को लेकर एक साझा दृष्टिकोण तैयार करना था। आयोजन का संचालन आमात्य फाउंडेशन के तत्वावधान में किया गया, जबकि इसके क्यूरेटर अदिति नंदन ने बिहार के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण विचार सामने रखे।
सम्मेलन में प्रमुख वक्ताओं के रूप में अवकासप्राप्त आईएएस एस सिद्धार्थ, शिक्षाविद् डॉ. राणा सिंह, जाह्नवी कुमारी मेवाड़, अनूप शर्मा बी'हैरी तथा पवन कुमार सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। सभी वक्ताओं का साझा निष्कर्ष यह था कि बिहार के विकास की कहानी केवल सड़कों, पुलों और भवनों तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए मजबूत संस्थागत ढांचा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार और नेतृत्व का विकास आवश्यक है।
ग्रैंड ट्रंक रोड इनिशिएटिव्स के क्यूरेटर अदिति नंदन ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति केवल आर्थिक समृद्धि में नहीं, बल्कि उसके युवाओं की सोच, चरित्र और नेतृत्व क्षमता में निहित होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि बिहार को अगले दशक में नई ऊंचाइयों तक पहुंचना है तो युवाओं को केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि अवसर और संस्थान बनाने वाला बनना होगा। उनके अनुसार इंस्टीट्यूशनल ट्रांसफॉर्मेशन ही बिहार के दीर्घकालिक विकास का सबसे मजबूत आधार बन सकता है।
मनी, मार्केट, मोमेंटम थीम पर आधारित इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों, निवेशकों और विचारकों ने हिस्सा लिया। मेवाड़ -निवेशक, फैमिली ऑफिस रणनीतिकार (पूर्व-रिकॉर्डेड) की राजकुमारी जाह्नवी कुमारी , सीजीएम सीजीएम, आरबीआई लोकपाल (आरबीआईओ)कुमार राजेश रंजन, आरबीआई लोकपाल (आरबीआईओ) कुमार राजेश रंजन, वरिष्ठ व्यापार पत्रकार पवन कुमार, समूह मुख्य डेटा और विश्लेषण अधिकारी,आदित्य बिरला समूह के पंकज राय, वरिष्ठ निदेशक और प्रमुख - जोखिम, इंफोमेरिक्स एनालिटिक्स एंड रिसर्च अविनाश चंद्र, जनसंपर्क और रणनीतिक संचार सलाहकार (संचालक) के अनुपम शर्मा , रंजन कांत, एमडी अर्थमेट, संस्थापक अभिषेक सिन्हा, पूर्व सह-संस्थापक और सीईओ, Caratlane.com के अवनीश आनंद, उपाध्यक्ष, लंदन एंड पार्टनर्स की दिव्या बजाज, पूर्व निदेशक, अरिस्टो और मैपरा लैब्स के सीएसओ, मार्श, महासचिव राजीव शर्मा और अशोक कुमार अर्थशास्त्री और लोक नीति विशेषज्ञ डॉ सुधांशु कुमार सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।विभिन्न सत्रों में वित्तीय न्यायशास्त्र में तकनीक की भूमिका, बिहार में फिनटेक की संभावनाएं, राज्य के वित्तपोषण और प्रवासी पूंजी के बेहतर उपयोग पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बिहार के विकास के लिए नवाचार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था और मजबूत संस्थागत ढांचे की जरूरत है। सम्मेलन में बिहार 2035 रोडमैप को लेकर भी सकारात्मक दृष्टिकोण पेश किया गया।
सम्मेलन का सबसे चर्चित विचार द सुपौल टेस्ट रहा। इस अवधारणा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि विकास और नवाचार केवल पटना, गया या मुजफ्फरपुर जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। बाढ़ प्रभावित और आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों, विशेषकर सुपौल जैसे क्षेत्रों तक बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और डिजिटल नवाचार की पहुंच सुनिश्चित करना ही किसी भी विकास मॉडल की असली परीक्षा होगी। वक्ताओं ने कहा कि यदि कोई नीति सुपौल जैसे जिलों में सफल होती है, तभी उसे वास्तविक अर्थों में समावेशी विकास कहा जा सकता है।
ग्रैंड ट्रंक रोड इनिशिएटिव्स के क्यूरेटर अदिति नंदन ने बिहार की पहचान को लेकर एक नया नैरेटिव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि बिहार को केवल गरीबी, पलायन और पिछड़ेपन के नजरिए से देखना राज्य के साथ अन्याय है। बिहार वह भूमि है जिसने दुनिया को शून्य, ज्ञान, दर्शन और प्रशासनिक दृष्टि दी है। आज भी यहां प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उस प्रतिभा को सही मंच, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराने की है।
अदिति नंदन ने जोर देकर कहा कि बिहार की सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की कमी नहीं बल्कि सामूहिक प्रयासों और संस्थागत समन्वय की कमी है। यदि सरकार, निजी क्षेत्र, निवेशक, शिक्षण संस्थान और प्रवासी बिहारी एक साझा मंच पर आ जाएं तो बिहार देश की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है।
सम्मेलन में वित्तीय नवाचार और फिनटेक को बिहार के विकास का महत्वपूर्ण इंजन बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल बैंकिंग, माइक्रो-फाइनेंस और फिनटेक सेवाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इन्हें गांवों, कस्बों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। तकनीक तभी सफल होगी जब वह स्थानीय जरूरतों और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप विकसित की जाए।
कृषि वित्त को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। मखाना, गन्ना, औषधीय पौधों, लेमनग्रास और अश्वगंधा जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए किसानों को आसान और सुलभ संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने पर बल दिया गया। साथ ही कृषि उत्पादों की वैल्यू चेन विकसित करने, स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की रणनीति पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना था कि कृषि आधारित उद्योग बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक सकते हैं।
प्रवासी पूंजी यानी डायस्पोरा इन्वेस्टमेंट भी सम्मेलन का प्रमुख विषय रहा। वक्ताओं ने कहा कि दुनिया भर में फैले लाखों अप्रवासी बिहारी अपने राज्य में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें भरोसेमंद और पारदर्शी प्लेटफॉर्म की जरूरत है। अदिति नंदन ने कहा कि पैसा बिहार आने को तैयार है, सवाल यह है कि क्या बिहार खुद को उस निवेश के लिए तैयार कर पा रहा है? उन्होंने सुझाव दिया कि प्रवासी पूंजी को केवल रियल एस्टेट तक सीमित रखने के बजाय स्टार्टअप, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि प्रसंस्करण और तकनीकी नवाचारों की ओर मोड़ा जाए।
सम्मेलन में इस बात पर भी सहमति बनी कि बिहार के अगले दशक का आर्थिक भविष्य पारंपरिक उद्योगों से अधिक डिजिटल इकोनॉमी, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी आधारित उद्यमों पर निर्भर करेगा। इसी उद्देश्य से मुंबई के बड़े फंड मैनेजरों और निवेशकों के साथ मिलकर बिहार के स्थानीय स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत एंजेल इन्वेस्टमेंट नेटवर्क विकसित करने का संकल्प लिया गया।
कुल मिलाकर GTRI 6.0 ने यह संदेश दिया कि बिहार की नई कहानी केवल विकास परियोजनाओं की नहीं, बल्कि प्रतिभा, पूंजी, तकनीक और नेतृत्व के संगम की कहानी होगी। यदि सम्मेलन में रखे गए विचार धरातल पर उतरते हैं तो “बिहार 2035” का सपना केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि एक नई आर्थिक और सामाजिक क्रांति का आधार बन सकता है।