आरटीआई मामले को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, लगभग 30 हजार लंबित अपीलों को लेकर कोर्ट गंभीर
Patna : राज्य में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों को लागू करने में भारी विफलता और राज्य सूचना आयोग में लगभग 30,000 अपीलों के लंबित होने के मामलें को पटना हाईकोर्ट ने बहुत गंभीरता से लिया है।
दरअसल राज्य में आरटीआई व्यवस्था में इस दुर्दशा के विरुद्ध कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अधिवक्ता प्रवीण कुमार द्वारा एक जनहित याचिका दायर की गई थी । कोर्ट में इस जनहित याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार शर्मा ने पक्ष को प्रस्तुत करते हुए बताया कि सूचना का अधिकार ,जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत नागरिकों के जानने के मौलिक अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक अभिन्न अंग है, वह आज अधिकारियों द्वारा सूचना देने में अत्यधिक विलंब और वैधानिक दंडों के प्रभावी ढंग से लागू नहीं होने के कारण पूरी तरह असफल हो गया है।
वर्तमान मामला बिहार में सूचना अधिकार तंत्र की पूर्ण व्यवस्थागत विफलता को दर्शाता है। जहाँ नागरिकों के आवेदन वर्षों तक आयोग में लंबित रहते हैं, दोषी लोक सूचना अधिकारियों पर अनिवार्य जुर्माना शायद ही कभी लगाया जाता है। आम लोगों को उनके सूचना के मौलिक अधिकार से वंचित रहना पड़ रहा है। अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष यह बात प्रमुखता से रखी कि ऐसी प्रशासनिक विफलताएँ इस अति महत्वपूर्ण कानून को कमजोर करती हैं। इससे व्यवस्था की पारदर्शिता, जवाबदेही और संपूर्ण लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है। जब नागरिकों को सूचना के अधिकार के अधिकार से वंचित किया जाता है, तो वास्तव में उनके मौलिक अधिकारों का हनन होता है ।
सुनवाई के दौरान, राज्य सूचना आयोग की ओर से वरीय अधिवक्ता ललित किशोर ने कोर्ट को सूचित किया कि इसी तरह का एक मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय में अगली सुनवाई 28 अप्रैल,2026 को निर्धारित है।
इन तथ्यों पर विचार करते हुए कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है, पटना हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई की तिथि 18 जून ,2026 निर्धारित की है। कोर्ट का यह आदेश इस बात का स्पष्ट करता है कि नागरिकों के सूचना प्राप्त करने के अधिकार को इस तरह मृत पत्र बनाकर निष्क्रिय नहीं होने दिया जा सकता है।