Bihar Food Safety : बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ कितने शुद्ध? ऐसे करें मिलावट की पहचान, जानें जांच का पूरा तरीका

Bihar Food Safety : पैकेट पर आकर्षक तस्वीरें, बड़े ब्रांड का नाम और गुणवत्ता के दावे उपभोक्ताओं को भरोसा दिला सकते हैं, लेकिन खाद्य पदार्थ में मिलावट है या नहीं, इसकी पुख्ता तस्दीक प्रयोगशाला में जांच के बाद ही हो सकती है।...

बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ कितने शुद्ध?- फोटो : X

Bihar Food Safety : बाजार में बिकने वाली खाद्य सामग्री की शुद्धता केवल पैकेट देखकर तय नहीं की जा सकती। पैकेट पर आकर्षक तस्वीरें, बड़े ब्रांड का नाम और गुणवत्ता के दावे उपभोक्ताओं को भरोसा दिला सकते हैं, लेकिन खाद्य पदार्थ में मिलावट है या नहीं, इसकी पुख्ता तस्दीक प्रयोगशाला में जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि खरीदारी के दौरान उपभोक्ता सतर्क रहें और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी रखें।

पैकेट बंद खाद्य सामग्री खरीदते समय निर्माण और एक्सपायरी की तारीख, सामग्री की सूची, निर्माता का पूरा पता, बैच नंबर, शुद्ध वजन, अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) और पोषण संबंधी जानकारी जरूर देखनी चाहिए। पैकेट की सील टूटी होने, लेबल पर जरूरी जानकारी नहीं होने या उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर उसे खरीदने से बचना चाहिए। हालांकि, इन विवरणों की जांच से केवल शुरुआती जानकारी मिलती है, मिलावट की पुष्टि नहीं होती।

बिहार में बढ़ेंगी खाद्य जांच की सुविधाएं

खाद्य सुरक्षा के लिए उपभोक्ताओं की जागरूकता के साथ विभागीय निगरानी और वैज्ञानिक जांच भी अहम है। वर्तमान में बिहार सरकार की मुख्य प्रयोगशाला संयुक्त औषधि एवं खाद्य नियंत्रण प्रयोगशाला अगमकुआं में स्थित है। खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि के नेतृत्व में सरकार मुजफ्फरपुर और भागलपुर में भी नई खाद्य जांच प्रयोगशालाएं खोलने की तैयारी कर रही है। इन प्रयोगशालाओं के शुरू होने से खाद्य पदार्थों की जांच व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

दो तरह से लिए जाते हैं खाद्य पदार्थों के नमूने

खाद्य सुरक्षा अधिकारी बाजार में बिकने वाली सामग्री की गुणवत्ता परखने के लिए मुख्य रूप से दो तरह के नमूने लेते हैं। पहला सर्विलांस यानी निगरानी नमूना और दूसरा कानूनी नमूना। सर्विलांस सैंपल का मकसद किसी क्षेत्र में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की स्थिति का आकलन करना है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित बाजार में निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई करने में मदद मिलती है।

वहीं, कानूनी नमूना निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिया जाता है। इसे चार हिस्सों में बांटने का प्रावधान है। एक हिस्सा जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है, जबकि शेष हिस्सों को नियमानुसार सुरक्षित रखा जाता है। खाद्य सुरक्षा प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट 14 दिनों के भीतर अभिहित पदाधिकारी को भेजी जाती है। यदि नमूना निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो संबंधित कारोबारी को नोटिस दिया जा सकता है और नियमों के अनुसार केंद्रीय प्रयोगशाला में दोबारा जांच कराने का विकल्प मिल सकता है। उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

आम नागरिक भी करा सकते हैं खाद्य पदार्थों की जांच

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आम नागरिक भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन कर खाद्य पदार्थों का नमूना जांच के लिए दे सकते हैं। इसके लिए आम नागरिकों के वास्ते फॉर्म-5बी का प्रावधान बताया गया है, जबकि खाद्य सुरक्षा अधिकारी फॉर्म-5ए का इस्तेमाल करते हैं। आवेदन के साथ निर्धारित शुल्क जमा करना और संबंधित दुकानदार को नियमानुसार सूचना देना जरूरी हो सकता है। शिकायत सही साबित होने पर जांच शुल्क वापस किए जाने का प्रावधान हो सकता है, जबकि शिकायत की पुष्टि नहीं होने पर शुल्क वापस नहीं मिलता। आवेदन करने से पहले संबंधित खाद्य सुरक्षा कार्यालय से मौजूदा प्रक्रिया और शुल्क की पुष्टि कर लेना उचित है।यदि किसी दुकान पर मिलावटी, दूषित या अस्वच्छ तरीके से खाद्य सामग्री बेचे जाने का संदेह हो, तो उपभोक्ता संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी या विभागीय कार्यालय में शिकायत कर सकते हैं।

मिठाइयों में रंग और सामग्री पर रखें नजर

त्योहारों और खास अवसरों पर मिठाइयों की खरीदारी करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। मिठाई की दुकानों पर इस्तेमाल की गई सामग्री की जानकारी निर्धारित नियमों के अनुसार प्रदर्शित होनी चाहिए। खाद्य पदार्थों में केवल अनुमत खाद्य रंगों का इस्तेमाल किया जा सकता है। औद्योगिक रंगों का उपयोग प्रतिबंधित है। लेड क्रोमेट जैसे जहरीले रसायनों का भोजन में इस्तेमाल गंभीर उल्लंघन है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।मिठाइयों पर लगाई जाने वाली चांदी की वर्क भी खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। उपभोक्ताओं को मिठाई का रंग, उसकी गुणवत्ता, स्वच्छता और भंडारण की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। केवल अधिक चमकदार रंग या आकर्षक रूप देखकर मिठाई को बेहतर गुणवत्ता वाला नहीं मानना चाहिए।

जागरूक उपभोक्ता ही मिलावट के खिलाफ मजबूत कड़ी

खाद्य पदार्थों में मिलावट पर रोक लगाने के लिए विभागीय कार्रवाई के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। खरीदारी के समय लेबल पढ़ना, बिल लेना, संदिग्ध उत्पादों से बचना और जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज कराना उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है। खाद्य सामग्री की शुद्धता पर संदेह होने पर स्वयं अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय अधिकृत प्रयोगशाला की जांच और विभागीय कार्रवाई पर भरोसा करना चाहिए। जागरूकता, सतर्कता और सख्त निगरानी से ही मिलावटखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।