Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी, कहा 'बराबर की गुफाएं दुनिया में कहीं और होतीं, तो पर्यटन का बड़ा केंद्र होतीं', प्रशासन की नियत पर उठाये सवाल

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने जहानाबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक मौर्यकालीन बराबर गुफाओं और वहां आयोजित होने वाले श्रावणी मेले की दुर्दशा तथा प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है।

पटना हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने बराबर की गुफा की  कड़ी टिप्पणी करते हुए  कहा कि दुनिया में ये कहीं और होता तो यह ऐतिहासिक धरोहर पर्यटन का केंद्र होता। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन केवल राजस्व वसूली में रुचि रखता है, विकास में एक रुपये निवेश करने की नीयत नहीं हैं। जहानाबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक मौर्यकालीन बराबर गुफाओं और वहां आयोजित होने वाले श्रावणी मेले की बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस राजीव रॉय की एकल पीठ ने राज कुमार द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के रवैये की तीखी आलोचना की। बिहार में विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने में बरती जा रही घोर लापरवाही पर कड़ा प्रहार करते हुए न्यायमूर्ति रॉय ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि कोर्ट आश्चर्य व्यक्त करता है कि मौर्य काल का यह महान ऐतिहासिक स्थल, जो दुनिया में अद्वितीय है, क्या इतनी घोर उपेक्षा का सामना कर  रहा हैं। यदि यह दुनिया के किसी अन्य हिस्से में होता, या भारत के दक्षिण/पश्चिम हिस्से में होता, या फिर मध्य प्रदेश राज्य में होता, जहाँ कई बौद्ध स्थल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं और राजस्व उत्पन्न कर रहे हैं। इसके साथ ही, मेले से मिलने वाले राजस्व के इस्तेमाल और सुविधाओं के अभाव पर कोर्ट ने तीखा प्रहार किया। कोर्ट ने कहा कि निश्चित रूप से, जिला प्रशासन केवल राजस्व एकत्र करने में रुचि रखता है, जबकि वहां बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए पैसे को वापस निवेश करने के प्रति उसकी जिम्मेदारी शून्य है।

याचिकाकर्ता  को वर्ष 2024-25 के श्रावणी मेले का ठेका ₹1,77,62,159 में मिला था। 12 अगस्त ,2024 को मेले के दौरान हुई भगदड़ में 7 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। इसके बाद प्रशासन ने क्षेत्र को 'नो वेंडिंग ज़ोन' घोषित कर दिया, जिससे दुकानों की बिक्री और राजस्व पूरी तरह ठप हो गया। इसके बावजूद ठेकेदार ने पूरी राशि चुका दी। हालांकि, जिला प्रशासन ने देरी से भुगतान का हवाला देते हुए ₹1,37,461 का जुर्माना नोटिस जारी कर दिया। हाईकोर्ट ने इस नोटिस को पूरी तरह तर्कहीन, संवेदनहीन और बिना विवेक का इस्तेमाल किया गया माना और इस पर रोक लगा दी। कोर्ट ने निर्देश देते हुए सभी प्रतिवादियों/अधिकारियों की जवाबदेही तय की। कोर्ट ने मामलें से जुड़े सभी विभागों और अधिकारियों को स्पष्ट समय-सीमा के भीतर ठोस और स्थायी कदम उठाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने  जिलाधिकारी, जहानाबाद को पिछले 5 वर्षों (2026-27 तक) में बराबर श्रावणी मेले से एकत्र किए गए कुल राजस्व का विवरण प्रस्तुत करने का  निर्देश   दिया।स्थायी शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था, बैठने के बेंच, स्थायी वेंडिंग ज़ोन और साफ़-सफ़ाई/हरियाली के लिए मास्टर प्लान (ब्लूप्रिंट) दाखिल करने का भी निर्देशदियी। केवल एक महीने के मेले के लिए बनाए जाने वाले अस्थायी इंतज़ामों का हलफनामा खारिज कर दिया जाएगा।साथ ही.पुलिस अधीक्षक, जहानाबाद को.पर्यटकों और श्रद्धालुओं की स्थायी सुरक्षा के लिए विस्तृत सुरक्षा ढांचा प्रस्तुत करने का निर्देश  दिया,ताकि 2024 जैसी भगदड़ की पुनरावृत्ति न हो। वन प्रमंडलीय अधिकारी / रेंजर, जहानाबाद को निर्देश  दिया कि गुफाओं के आसपास के क्षेत्र को हरा-भरा बनाने और जर्जर पड़े डाक बंगले के जीर्णोद्धार के संबंध में जवाब दाखिल करें। कार्यपालक अभियंता, भवन निर्माण विभाग को निर्देश दिया गयी कि विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने हेतु राज्य सरकार या प्रशासन को भेजे गए प्रस्तावों की रिपोर्ट दें।

कोर्ट ने सिविल सर्जन, जहानाबाद को निर्देश  देते   हुए कहा कि आपातकालीन स्थिति और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने के उठाए गए कदमों की जानकारी दें।कोर्ट ने प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचलाधिकारी, मखदुमपुर क्षेत्र की साफ़-सफ़ाई और कचरा प्रबंधन में विफलता पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश सभी प्रतिवादियों को 6 सप्ताह के भीतर अपना ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। समय पर हलफनामा न दाखिल करने पर प्रति डिफॉल्टर ₹2,000 की राशि पटना हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी में जमा करानी होगी। निष्पक्ष न्यायिक निरीक्षण: न्यायिक अधिकारियों की समिति गठित की गई हैं।

कोर्ट ने केवल प्रशासनिक दावों पर निर्भर न रहकर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जहानाबाद को एक विशेष निरीक्षण समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इस समिति का नेतृत्व मीतू सिंह (जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, जहानाबाद करेंगी। यह न्यायिक समिति रविवार या किसी गैर-कार्य दिवस पर बराबर गुफाओं का प्रत्यक्ष दौरा करेगी और वहां की वास्तविक स्थिति तथा स्थायी बुनियादी ढांचे के विकास हेतु अपनी प्रत्यक्ष रिपोर्ट कोर्ट में सौंपेगी। प्रशासन को इस समिति के दौरे के दौरान सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर, 2026 को होगी।