Patna IGIMS कॉलेज है, कोठा नहीं... पोस्टर के साथ नर्सिंग छात्राओं का उग्र प्रदर्शन, 48 घंटे से मेन गेट जाम,अस्पताल सेवाएं ठप,प्रिंसिपल पर प्रताड़ना का आरोप
Patna IGIMS के मुख्य द्वार पर छात्राएं हाथों में तख्तियां लेकर बैठी हैं, जिन पर लिखा है-“कॉलेज है, कोठा नहीं”, “मानसिक प्रताड़ना बंद करो”, और “हमें न्याय चाहिए। यह नारेबाजी अब एक गंभीर संस्थागत संकट का रूप ले चुकी है।...
Patna IGIMS: पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के नर्सिंग कॉलेज में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। संस्थान के मुख्य द्वार पर नर्सिंग छात्राओं का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी है, जिससे पूरा अस्पताल परिसर एक तरह से ठप पड़ गया है। एंबुलेंस की आवाजाही रुक गई है, डॉक्टरों की एंट्री बाधित है और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छात्राओं का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन में तैनात प्रिंसिपल अनुजा डैनियल और वाइस प्रिंसिपल रुपाश्री दासगुप्ता द्वारा उनके साथ लगातार दुर्व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जाता है। प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि उन्हें जानबूझकर परीक्षा में फेल किया जाता है और इंटरनल मार्क्स में भी मनमानी की जाती है।
प्रदर्शन स्थल पर छात्राएं हाथों में तख्तियां लेकर बैठी हैं, जिन पर लिखा है-कॉलेज है, कोठा नहीं, “मानसिक प्रताड़ना बंद करो”, और “हमें न्याय चाहिए। यह नारेबाजी अब एक गंभीर संस्थागत संकट का रूप ले चुकी है। छात्राओं का कहना है कि पिछले कई महीनों से माहौल डर और दबाव का बना हुआ है। विरोध करने पर परिणाम खराब करने की धमकी दी जाती है, जिससे छात्राएं खुलकर आवाज नहीं उठा पा रही थीं। एक छात्रा ने भावुक होकर कहा कि यहां पढ़ाई से ज्यादा मानसिक तनाव है, कई छात्राएं डिप्रेशन में चली गई हैं।
सूत्रों के अनुसार कुछ छात्राओं ने पहले भी शिकायत दर्ज कराई थी और एक जांच कमेटी भी बनी थी, लेकिन उस रिपोर्ट पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस निष्क्रियता के चलते अब गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने आरोप लगाया कि कई बार असफल परिणाम देकर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ा गया, जिससे कुछ मामलों में गंभीर परिणाम भी सामने आए। यह आरोप संस्थान की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। गुरुवार को भी करीब 450 छात्राओं ने कैंपस के भीतर प्रदर्शन किया था, लेकिन बुधवार से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरी तरह मुख्य गेट पर केंद्रित हो गया है।
स्थिति यह है कि अस्पताल का मुख्य प्रवेश द्वार पूरी तरह अवरुद्ध है। मरीज, डॉक्टर और स्टाफ सभी प्रभावित हैं, जिससे आपात सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस समाधान या बातचीत की पहल सामने नहीं आई है।
छात्राओं का साफ कहना है कि जब तक प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन समाप्त नहीं होगा। अब यह विरोध केवल एक कॉलेज विवाद नहीं बल्कि संस्थागत जवाबदेही और छात्र सुरक्षा का बड़ा सवाल बन चुका है।