पटना में 'ISMSICS PAO 2026' मीट आयोजित, मोतियाबिंद सर्जरी की नई और किफायती तकनीक पर हुई चर्चा
राजधानी पटना में 'ISMSICS और PAO के संयुक्त तत्वावधान में 'दूसरी ईस्ट ज़ोनल ISMSICS PAO 2026 मीट' का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में 150 से अधिक नेत्र विशेषज्ञों ने भाग लिया और 'स्मॉल इन्सिजन मोतियाबिंद सर्जरी' की नई तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की...
Patna : 'इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर मैनुअल स्मॉल इन्सिजन मोतियाबिंद सर्जरी' (ISMSICS) और 'पटना एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी' (PAO) के संयुक्त तत्वावधान में होटल ऑरम, पटना में 'दूसरी ईस्ट ज़ोनल ISMSICS PAO 2026 मीट' का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में 150 से अधिक नेत्र विशेषज्ञों ने भाग लिया और 'स्मॉल इन्सिजन मोतियाबिंद सर्जरी' की नई तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने इसे एक अत्यंत किफायती और सुलभ तकनीक बताया, जिससे चिकित्सकों का निवेश कम होता है और मरीजों पर भी आर्थिक बोझ काफी घट जाता है।
सम्मेलन का उद्घाटन और अतिथियों के विचार
कार्यक्रम का उद्घाटन लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के मंत्री संजय कुमार सिंह एवं बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। मंत्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि विश्व स्तर पर मोतियाबिंद अंधत्व का प्रमुख कारण है और उम्र बढ़ने के साथ आंखों के लेंस पर प्रोटीन जमा होने से रोशनी धुंधली हो जाती है। वहीं, प्रो. रणवीर नंदन ने सचेत किया कि भारत में डायबिटीज का प्रसार 10 से 11 प्रतिशत तक पहुँच चुका है और 15 से 20 प्रतिशत मरीजों में 'डायबिटिक रेटिनोपैथी' जैसी गंभीर बीमारी हो रही है।
अनियंत्रित डायबिटीज और रेटिना को नुकसान
ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बी. के. नायक और प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार सिंह ने बताया कि अनियंत्रित डायबिटीज का असर आंखों की ऑप्टिक नर्व पर पड़ता है। समय पर इलाज न मिलने पर ऑप्टिक नर्व को पहुँचने वाला यह नुकसान स्थाई अंधेपन का कारण बन सकता है और मरीजों में ग्लूकोमा का खतरा काफी बढ़ जाता है।
कैमरे की फिल्म की तरह काम करती है रेटिना
डॉ. सुधीर कुमार ने रेटिना की कार्यप्रणाली को समझाते हुए बताया कि रेटिना आंख के पिछले हिस्से की एक संवेदनशील परत है जो कैमरे की फिल्म की तरह काम करती है। लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रेटिना की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुँचाता है, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है। सम्मेलन में डॉ. नागेन्द्र प्रसाद, डॉ. बिभूति प्रसन्न सिन्हा, डॉ. सुभाष प्रसाद, डॉ. नीलेश मोहन, डॉ. अनीता अंबस्ता सहित राज्य के कई जाने-माने नेत्र विशेषज्ञ मौजूद थे।
वंदना की रिपोर्ट