Bihar News : पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बिहार के जेल वार्डरों को 2015 से मिलेगा एक माह का अतिरिक्त वेतन, सरकार की दलीलें की खारिज
Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह आदेश दिया है कि जेल वार्डरों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक माह का अतिरिक्त वेतन साल 2019 या 2024 से नहीं, बल्कि 27 अगस्त, 2015 से दिया जाए.....पढ़िए आगे
PATNA : पटना हाईकोर्ट से बिहार के जेलों में तैनात हजारों वार्डरों (कक्षपाल) के लिए एक बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने बिहार जेल मेन्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका को मंजूर करते हुए 2015 से प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक माह का अतिरिक्त वेतन देने काआदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जेल वार्डरों को एक माह के अतिरिक्त वेतन के बराबर मानदेय 28 जनवरी, 2019 या 3 अक्टूबर,2024 से नहीं, बल्कि 27 अगस्त, 2015 से देना होगा। जस्टिस डॉ. अंशुमान की एकलपीठ ने बिहार जेल मेन्स एसोसिएशन की अर्जी पर सुनवाई के बाद दिया।
राज्य सरकार ने 27 अगस्त, 2015 को एक संकल्प जारी कर बिहार पुलिस, फायर सर्विस, जीआरपी, बीएमपी और जिला पुलिस के अराजपत्रित कर्मियों को हर वित्तीय वर्ष में एक माह के वेतन के बराबर अतिरिक्त मानदेय देने का निर्णय लिया था। लेकिन जेल विभाग के वार्डरों को इस लाभ से वंचित रखा गया। बाद में कारा निरीक्षणालय ने पत्र संख्या 712 दिनांक 28 जनवरी 2019 के जरिए जेल कर्मियों को संशोधित भत्ते देने का आदेश दिया, और फिर गृह विभाग (कारा) के पत्र 7876 दिनांक 3 अक्टूबर 2024 से वार्डरों को एक माह का मानदेय देने का निर्णय लिया गया। एसोसिएशन ने इसी भेदभाव मान इसे कोर्ट में चुनौती दी।
वही राज्य सरकार की ओर से पेश हर दलील को कोर्ट ने नामंजूर कर दिया। कोर्ट ने अपने पूर्व के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि निगरानी विभाग के कर्मियों को भी 2015 से ही लाभ देने का आदेश दिया गया है। उस फैसले को चुनौती दी गई।
लेकिन खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि जब मूल नीति 2015 में आई, तो फिर जेल वार्डरों को 2015 के बजाये 2019 से क्यों दी जायेगी।कोर्ट ने कहा कि तकनीकी चूक के कारण किसी वर्ग को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। समान काम के लिए समान वेतन संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का मूल सिद्धांत है।