Bihar Politics: जदयू से बगावत करना सांसद को पड़ सकता है महंगा, गिरधारी यादव की सदस्यता पर लटकी तलवार,पार्टी ने जारी किया नोटिस

Bihar Politics: बांका से जदयू सांसद गिरधारी यादव पर पार्टी ने सख़्त रुख़ अख़्तियार करते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता पर लटकी तलवार- फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की सियासत में इस वक़्त हलचल अपने शबाब पर है, जहां सत्तारूढ़ दल के अंदर ही विरोध की चिंगारी अब शोला बनती दिख रही है। बांका से जदयू सांसद गिरधारी यादव  पर पार्टी ने सख़्त रुख़ अख़्तियार करते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम पार्टी विरोधी गतिविधियों के इल्ज़ाम के तहत उठाया गया है, जिसने सियासी गलियारों में सनसनी फैला दी है।

जदयू संसदीय दल के नेता और सुपौल से सांसद दिलेश्वर कामत ने लोकसभा स्पीकर को औपचारिक नोटिस सौंपकर गिरधारी यादव की सदस्यता खत्म करने की मांग की है। इसे पार्टी अनुशासन को बनाए रखने की सख़्त कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, यह पूरा मामला उस वक़्त तूल पकड़ गया जब गिरधारी यादव ने एसआईआर से जुड़े एक अहम फैसले पर पार्टी लाइन से हटकर बयान दे दिया। उन्होंने इस फैसले को तुग़लकी फरमान करार देते हुए इसे जल्दबाज़ी में लिया गया ग़लत क़दम बताया था। यही बयानबाज़ी उनके लिए सियासी मुसीबत बन गई और पार्टी नेतृत्व की नाराज़गी खुलकर सामने आ गई।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही सार्वजनिक तौर पर कम बोलते हों, मगर उनके सियासी अंदाज़ को जानने वाले कहते हैं कि जब कोई नेता उनकी नज़र से उतर जाता है, तो फिर उसके खिलाफ़ कार्रवाई तय मानी जाती है। ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान बांका में जो हुआ, उसने इन अटकलों को और हवा दे दी। मंच पर तमाम नेता मौजूद थे, लेकिन गिरधारी यादव की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए।

पहले ही पार्टी की तरफ़ से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया था। लेकिन अब मामला सिर्फ़ नोटिस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे उनकी संसदीय सदस्यता पर ख़तरे की तलवार लटक गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ़ कर दिया है कि जदयू में अनुशासन को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। साथ ही, यह भी संकेत मिल रहे हैं कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी लाइन से हटने वालों के लिए आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। बिहार की सियासत में यह टकराव अब एक नए सियासी मोड़ की ओर बढ़ता दिख रहा है।

धीरेंद्र कुमार की रिपोर्ट