Bihar Longest Ganga Bridge: 20 मिनट में सिमटेगा घंटों का सफर, बिहार के सबसे बड़े गंगा कॉरिडोर पर इस दिन से दौड़ेगी गाड़ियां, 6-लेन कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल से पटना से सीमांचल तक सफर होगा आसान

Bihar Longest Ganga Bridge:कई बार यात्रियों को लंबी दूरी तय करने में कई घंटे लग जाते हैं। लेकिन इस नए पुल के चालू होने के बाद वही सफर महज 15 से 20 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

पटना से सीमांचल तक सफर होगा आसान- फोटो : social Media

Bihar Longest Ganga Bridge: बिहार के विकास की तस्वीर बदलने वाली बहुप्रतीक्षित कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6-लेन गंगा पुल परियोजना अब अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। अगले महीने यह अत्याधुनिक पुल आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। करीब 9.75 किलोमीटर लंबा यह पुल गंगा नदी पर बना बिहार का सबसे लंबा पुल होगा, जो उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन को नई रफ्तार देगा।

करीब 4,988 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस मेगा परियोजना का 98 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। निर्माण एजेंसियां शेष तकनीकी और फिनिशिंग कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा करने में जुटी हैं। लक्ष्य है कि जुलाई के पहले सप्ताह तक पुल को पूरी तरह चालू कर दिया जाए, ताकि मानसून के दौरान राघोपुर दियारा समेत आसपास के लाखों लोगों को राहत मिल सके।कुल 19.76 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में लगभग 10 किलोमीटर एप्रोच रोड और 9.75 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल शामिल है। यह पुल सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि बिहार की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर माना जा रहा है।

वर्तमान में सीमांचल, समस्तीपुर, वैशाली और हाजीपुर की ओर से पटना आने-जाने वाले लोगों को अक्सर महात्मा गांधी सेतु पर घंटों जाम का सामना करना पड़ता है। कई बार यात्रियों को लंबी दूरी तय करने में कई घंटे लग जाते हैं। लेकिन इस नए पुल के चालू होने के बाद वही सफर महज 15 से 20 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

इस छह-लेन पुल पर वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगे, जिससे माल ढुलाई और यात्री परिवहन दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। पुल शुरू होने के बाद गांधी सेतु पर वर्षों से बना ट्रैफिक का भारी दबाव भी काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।यह महत्वाकांक्षी परियोजना NH-30 (पटना-बख्तियारपुर बाईपास) को सीधे NH-103 (बिदुपुर) से जोड़ेगी। साथ ही प्रस्तावित पटना रिंग रोड और आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से भी इसका सीधा संपर्क होगा। इससे उत्तर बिहार, सीमांचल और मिथिलांचल के लोगों को तेज और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी।

परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक ने लगभग 3,396 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया है, जबकि भूमि अधिग्रहण पर करीब 697 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। पुल का निर्माण डेवू इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन और लार्सन एंड टुब्रो द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। बिहार के लिए यह पुल सिर्फ गंगा पर बना एक नया रास्ता नहीं, बल्कि विकास, व्यापार, निवेश और तेज आवागमन का नया द्वार साबित होने जा रहा है। इसके शुरू होते ही राज्य के सड़क नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी और लाखों लोगों की यात्रा आसान हो जाएगी।